दिल्ली हाई कोर्ट वकीलों ने जिले के न्यायालयों के वित्तीय अधिकार को ₹20 करोड़ तक बढ़ाने की मांग पर हड़ताल को अस्थायी रूप से रोक दिया। यह निर्णय केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन मेघवाल और मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय से हुई बैठक के बाद लिया गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- वकीलों ने वित्तीय अधिकार वृद्धि के विरोध में हड़ताल रद्द की
- केंद्रीय विधि मंत्री और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ बैठक हुई
- भविष्य में न्यायिक सुधार की संभावनाएं बने रहेंगी
दिल्ली हाई कोर्ट वकीयों ने 14 जुलाई को शुरू की गई हड़ताल को 17 जुलाई से पहले ही समाप्त कर दिया, क्योंकि उन्होंने केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन मेघवाल और मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के साथ विस्तृत चर्चा की। इस कदम का कारण जिला न्यायालयों के pecuniary jurisdiction (वित्तीय अधिकार) को वर्तमान ₹2 करोड़ से बढ़ाकर ₹20 करोड़ करने की प्रस्तावित योजना थी, जिसे कई वकीलों ने अपने अभ्यास, आजीविका और पेशेवर हितों के लिए खतरा माना था।
पृष्ठभूमि
वित्तीय अधिकार वह अधिकतम राशि है जिसके तहत कोई अदालत मामला सुन सकती है। वर्तमान में दिल्ली हाई कोर्ट उन नागरिक एवं व्यापारिक मामलों को सुनता है जिनकी मूल्य सीमा ₹2 करोड़ से अधिक है, जबकि जिला न्यायालयों की सीमा ₹2 करोड़ तक सीमित है।समन्वय समिति सभी जिला कोर्ट बार एसोसिएशनों की ने कई वर्षों से इस सीमा को ₹20 करोड़ तक बढ़ाने की मांग की थी, ताकि उच्च न्यायालयों का बोझ घटे और निचली अदालतों को अधिक मामलों का अधिकार मिले।
विधायी पहलू
इस विषय पर हाई कोर्ट के पूर्ण न्यायालय ने समर्थन व्यक्त किया, परन्तु प्रतिनिधि समिति ने कहा कि pecuniarity की सीमा बदलना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है, क्योंकि इसके लिए दिल्ली हाई कोर्ट अधिनियम में संशोधन आवश्यक है। 10 जुलाई को एक दोहरी बेंच ने "Pecuniary Jurisdiction Report" को रोकने की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विधायी प्रक्रिया अभी भी लंबी है।
प्रभाव और भविष्य
यदि प्रस्तावित सीमा वृद्धि लागू होती है, तो हाई कोर्ट के मामलों में लगभग 70 % की कमी आ सकती है, जिससे अदालतों के कार्यभार में संतुलन आएगा, परन्तु वकीलों के लिए उच्च न्यायालय में काम करने के अवसर कम हो सकते हैं। वर्तमान में वकीयों ने इस परिवर्तन को "पेशेवर हितों के लिए जोखिम" कहा, लेकिन सरकार के साथ हुए संवाद से संकेत मिलता है कि आगे के चरणों में परस्पर समझौते की संभावना है।
समाप्ति के बाद, बार एसोसिएशन ने कहा कि "कारण अब भी जारी रहेगा", अर्थात् वे इस मुद्दे पर सतत निगरानी और कानूनी उपायों के लिए तैयार रहेंगे।