तेलंगाना के सिंचाई और सिविल सप्लाई मंत्री न. उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि राज्य सरकार ने जल परियोजनाओं को शीर्ष प्राथमिकता दी है और सभी प्रशासनिक, वित्तीय व कानूनी अड़चनें जल्द ही सुलझाई जाएँगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तेलंगाना सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है
  • सहरबाड़ी परियोजना के लिए गोदावरी जल के 67 टीएमसी का अंतिम स्वीकृति प्राप्त
  • भू-स्वामित्व व मुआवजा प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश

तेलंगाना के सिंचाई एवं सिविल सप्लाई मंत्री न. उत्तम कुमार रेड्डी ने शनिवार को सथुपल्ली टनल पॉइंट पर आयोजित समीक्षा बैठक में कहा कि राज्य सरकार ने जल परियोजनाओं को "सबसे ऊँची प्राथमिकता" दी है और सभी प्रकार की बाधाओं—प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी—को शीघ्र हल किया जाएगा। यह घोषणा तब हुई जब उन्होंने उपमुख्य मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और राजस्व मंत्री पोंगुलेती श्रीनिवास रेड्डी के साथ सिथरामा प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया।

सिथरामा परियोजना की उपलब्धि

उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि उन्होंने सिंचाई मंत्री पद संभालते ही गोदावरी जल के 67 टेराक्यूबिक मीटर (TMC) के उपयोग के लिए केंद्रीय जल आयोग (CWC) की अंतिम मंजूरी हासिल कर ली। यह स्वीकृति न केवल परियोजना की गति को तेज करेगी, बल्कि किसानों को पर्याप्त जल उपलब्ध कराकर कृषि उत्पादन में सुधार का वादा भी करेगी।

भू-स्वामित्व और मुआवजा प्रक्रिया पर नया फोकस

मंत्री ने स्पष्ट किया कि अगले चरण में भूमि अधिग्रहण को "सर्वोच्च प्राथमिकता" दी जाएगी। उन्होंने जिलाधिकारी एवं सिंचाई अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मुआवजा भुगतान को शीघ्र प्रोसेस करके भूमि अधिग्रहण को तेज करें, जिससे परियोजना की समयसीमा पर कोई अड़चन न आए।

इतिहासिक पृष्ठभूमि और पूर्व परियोजनाएँ

उत्तम ने यह भी रेखांकित किया कि कांग्रेस सरकार ने राजीव सागर और इंदिरा सागर जैसी महत्त्वपूर्ण जल परियोजनाओं की शुरुआत की थी, लेकिन समय पर पूर्ण न हो पाने के कारण लागत अधिक हुई। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ये परियोजनाएँ समय पर पूरी होतीं तो तेलंगाना को समान जल लाभ कम खर्च में मिल सकता था।

भविष्य की दिशा और राजनीतिक प्रभाव

उत्तम कुमार रेड्डी ने आश्वासन दिया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ—सिथरामा, सिथरामा सागर और अन्य—समाप्त हो जाएँगी। यह घोषणा जल सुरक्षा के प्रति बढ़ती आशा को जागृत करती है और राज्य की कृषि‑आधारित अर्थव्यवस्था को स्थायित्व प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, यह राजनीतिक रूप से भी सरकार को एक सकारात्मक छवि देता है, विशेषकर आगामी चुनावी माह में।