तेलंगाना सिविल सप्लाईज़ विभाग ने सभी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) रेशन कार्डधारकों का ई‑केवाईसी 15 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता को बढ़ाना और लाभार्थियों को सही‑समय पर राशन उपलब्ध कराना है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सभी NFSA रेशन कार्डधारकों का eKYC 15 दिनों में पूरा किया जाएगा।
- हैदराबाद, रांगा रेड्डी, मेधाचल आदि 8 जिलों में विशेष ड्राइव आयोजित किए जाएंगे।
- eKYC से PDS में भ्रष्टाचार घटेगा और लाभार्थियों को सही‑समय पर सहायता मिलेगी।
तेलंगाना सिविल सप्लाईज़ विभाग ने एक उच्च‑स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सभी NFSA रेशन कार्डधारकों का इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी (eKYC) 15 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश जारी किया। यह कदम राज्य के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को डिजिटल रूप में सुदृढ़ करने और लाभार्थियों की पहचान को सटीक बनाकर भ्रष्टाचार को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पृष्ठभूमि और महत्व
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत भारत में लगभग 8 करोड़ परिवार को रेशन कार्ड जारी किया गया है। परंतु कई सालों से कागजी प्रक्रिया, दोहरी सूची और अनुचित लाभ वितरण की शिकायतें आती रही हैं। eKYC, जिसमें बायोमैट्रिक और दस्तावेज़ प्रमाणीकरण शामिल है, इन समस्याओं को तकनीकी रूप से हल करने की संभावनाएँ प्रदान करता है।
विशेष ड्राइव और कार्य योजना
विभाग के आयुक्त स्टीफ़न रवेन्द्र ने हैदराबाद, रांगा रेड्डी, मेधाचल मल्काजगिरि, संगारेड्डी, सिद्दिपेट, निज़ामाबाद और कुमराम भीम असिफ़ाब जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने प्रत्येक फेयर प्राइस शॉप (FPS) में विशेष eKYC कैंप लगाकर सभी पेंडिंग लाभार्थियों को कवर करने का निर्देश दिया। अतिरिक्त निदेशकों, जिला सिविल सप्लाईज़ अधिकारियों (DCSO), सहायक सिविल सप्लाईज़ अधिकारियों (ACSO) और NIC अधिकारियों को इस प्रक्रिया में सहयोग करने का आग्रह किया गया।
प्रभाव और अपेक्षित परिणाम
यदि 15‑दिन की समयसीमा पूरी हो जाती है, तो तेलंगाना में PDS की पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। ई‑केवाईसी के माध्यम से डुप्लिकेट कार्ड, फर्जी एंट्री और दुरुपयोग को न्यूनतम किया जा सकेगा, जिससे वास्तविक जरूरतमंदों को समय पर राशन मिल सकेगा। साथ ही, डिजिटल रिकॉर्ड का निर्माण भविष्य में डेटा‑आधारित नीति निर्माण में सहायक होगा।
भविष्य की दिशा
यह पहल केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाकर राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ कर सकते हैं। सरकार को इस प्रक्रिया के निरंतर निगरानी, तकनीकी समर्थन और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त संसाधन आवंटित करने की आवश्यकता होगी।