तेलंगाना के उपमुख्य मंत्री मल्लू भट्टि विक्रमार्क ने रोहित वेंगला (टेलंगाना) बिल का व्यापक मसौदा तैयार करने के लिए अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही का निर्देश दिया। यह विधेयक उच्च शिक्षा संस्थानों में पहचान‑आधारित भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में एक प्रमुख कदम है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- रॉहित वेंगला बिल का मसौदा जल्द तैयार किया जाएगा
- उच्च शिक्षा में पहचान‑आधारित भेदभाव को समाप्त करने का लक्ष्य
- जनमत संग्रह, सार्वजनिक परामर्श और कानूनी विशेषज्ञता को शामिल किया जाएगा
तेलंगाना के उपमुख्य मंत्री मल्लू भट्टि विक्रमार्क ने राज्य सचिवालय में आयोजित कैबिनेट उपसमिति की पहली बैठक में अधिकारियों को रोहित वेंगला (टेलंगाना) (उच्च शिक्षा में पहचान‑आधारित भेदभाव रोकथाम) बिल, 2026 का व्यापक मसौदा तैयार करने का आदेश दिया। यह कदम राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में प्रणालीगत भेदभाव को समाप्त करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि और प्रेरणा
2020 में हैदराबाद विश्वविद्यालय में छात्र रोहित वेंगला की असामयिक मृत्यु ने पूरे भारत में गहरा झटका दिया। उनकी मृत्यु को पहचान‑आधारित भेदभाव का सीधा परिणाम मानते हुए, तेलंगाना सरकार ने इस घटना को स्मरणीय बनाते हुए एक विशेष विधेयक तैयार करने का निर्णय लिया। इस विधेयक का प्रमुख उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता, आत्म‑सम्मान और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
उपसमिति के निर्देश और कार्यप्रणाली
विक्रमार्क ने बताया कि एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा जो विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल करेगी, ताकि मसौदे की तैयारी में गति लाई जा सके। उन्होंने कर्नाटक में समान पहल की जांच करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की सलाह भी दी। विधेयक का प्रारूप लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाएगा, जिसमें राज्य भर के राजनीतिक दल, नागरिक संगठनों और छात्र समूहों से व्यापक परामर्श शामिल होगा।
कानूनी विशेषज्ञता और सार्वजनिक सहभागिता
केंद्रीय स्तर पर विधेयक की कानूनी वैधता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की वकील और सामाजिक कार्यकर्ता दीशा वडेकर को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। उनका एलएल.एम. कोलंबिया लॉ स्कूल से होने वाला शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सामाजिक न्याय में अनुभव मसौदे को कानूनी रूप से ठोस बनाने में मदद करेगा। इसके अलावा, अंतिम ड्राफ्ट को राज्य विधायिका में पेश करने से पहले सभी हितधारकों की प्रतिक्रिया को सम्मिलित किया जाएगा।
आगे का मार्ग
उपसमिति के सदस्य दुद्दिला श्रीधर बाबू, नालमादा उत्तम कुमार रेड्डी और पोन्नम प्रभाकर ने इस पहल में सक्रिय भागीदारी की घोषणा की। सभी सुझावों को एकत्रित करने के बाद, कैबिनेट उपसमिति अंतिम मसौदा तैयार करके राज्य विधानसभा में प्रस्तुत करेगी, जिससे विधेयक को विधायी प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जा सके। यह कदम तेलंगाना को समानता‑आधारित शिक्षा नीति के अग्रदूत के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।