तमिलनाडु की सशक्त समिति, जो कानून के साथ टकराव में बच्चों की देखभाल के लिए बनाई गई थी, 2024 के गठन के बाद से अब तक एक भी बैठक नहीं बुलाई गई है। इस निष्क्रियता ने हाल ही में अठुर में एक सरकारी सुरक्षा गृह से 12 नाबालिगों के भागने को उजागर किया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सशक्त समिति 2024 में बनी, लेकिन अब तक कोई बैठक नहीं हुई।
  • अठुर में सुरक्षा गृह से 12 नाबालिगों का भागना समिति की अक्षमता को उजागर करता है।
  • समिति के प्रमुख पद (डायरेक्टर) लंबे समय से खाली हैं, जिससे कार्यकुशलता प्रभावित हुई।

तमिलनाडु सरकार ने 2024 में सशक्त समिति ऑन स्पेशल सर्विसेज फॉर चिल्ड्रेन (Empowered Committee on Special Services for Children) का गठन किया, जिसका उद्देश्य कानून के साथ टकराव में पड़े बच्चों के लिए सरकारी गृहों का प्रबंधन, सुधार और निगरानी करना था। इस 15‑सदस्यीय समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव द्वारा की गई थी और इसमें सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, और विभिन्न विभागों के सचिव शामिल थे।

बैठकें न होने का तथ्य

समिति के गठन पर प्रारंभिक रूप से एक बैठक निर्धारित की गई थी, लेकिन वह रद्द कर दी गई। तब से लेकर आज तक, कोई भी बैठक नहीं बुलाई गई, जबकि समिति को त्रैमासिक रूप से मिलना था। इस देरी का कारण आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया, परन्तु कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रशासनिक अकार्यक्षमता और राजनीतिक अटकलों का परिणाम हो सकता है।

अठुर घटना और उसकी प्रासंगिकता

अभी हाल ही में चेंगलपट्टु के निकट अठुर में स्थित एक सरकारी सुरक्षा गृह से 12 नाबालिगों का भागना हुआ। यह घटना समिति की निष्क्रियता का सीधा परिणाम माना जा रहा है, क्योंकि यदि नियमित रूप से समीक्षा और सुधारात्मक कार्यवाही की जाती तो इस प्रकार की सुरक्षा चूक संभवतः नहीं होती।

खाली पद और प्रशासनिक अड़चनें

समिति का संयोजक बाल कल्याण एवं विशेष सेवाएँ (CWSS) निदेशक है, परन्तु इस पद पर 2025 के अगस्त से अब तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है। पूर्व निदेशक जॉनी टॉम वर्गीस के स्थानांतरण के बाद यह खालीपन बना रहा, जिससे विभाग की कार्यक्षमता में गंभीर गिरावट आई है। बाल अधिकार कार्यकर्ता इस बात को दोहराते हैं कि नेतृत्व की कमी से नीति कार्यान्वयन में बाधा आती है।

आगे का रास्ता और संभावित सुधार

2024 के सरकारी आदेश में समिति को बच्चों के स्वास्थ्य, भोजन, प्रशिक्षण, स्टाफिंग, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और पुनर्वास कार्यक्रमों की देखरेख का कार्य सौंपा गया था। यदि समिति शीघ्र ही अपनी पहली बैठक बुलाकर इन बिंदुओं की समीक्षा शुरू करती है, तो न केवल मौजूदा गृहों में सुधार हो सकेगा, बल्कि भविष्य में बच्चों के पुनर्वास और समाजीकरण की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी। विशेषज्ञों का तर्क है कि एक सक्रिय, समयबद्ध समिति नाबालिग अपराध को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।