सुप्रीम कोर्ट ने अपने दो साल पुराने फैसले को फिर से स्पष्ट किया – सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण हटाने के लिये बुलडोजर का उपयोग अनुमत है, बशर्ता नगरपालिका नियमों का कड़ाई से पालन हो। व्यक्तिगत अपमान याचिकाओं को अब संबंधित हाइ कोर्टों को सौंपा जाएगा, जहाँ तथ्य‑जाँच की जाएगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बुलडोजर का उपयोग केवल वैध प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकता है।
- व्यक्तिगत अपमान याचिकाएँ उच्च न्यायालयों में सुनी जाएँगी।
- फैक्ट‑फ़ाइंडिंग के लिए जिला न्यायिक अधिकारी शामिल होंगे।
नई दिल्ली – दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने "बुलडोजर जस्टिस" को लेकर एक विस्तृत आदेश जारी किया था, जिसमें अवैध निर्माणों के निपटारे में चयनात्मक व्यवहार को रोकने की बात कही गई थी। इस महीने एक नई सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सार्वजनिक भूमि पर अवैध संरचनाओं के निक्षेप को रोकने के लिये बुलडोजर के उपयोग पर सर्वव्यापी प्रतिबंध नहीं है।
कानूनी पृष्ठभूमि
13 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया था, जिसमें जज जॉयमाल्य बागची, जस्टिस वी मोहाना और सीजीआई सूर्यकांत ने बताया कि बुलडोजर का उपयोग केवल तब ही उचित है, जब नगर निगम के नियम‑कानून पूरी तरह लागू हों। इस निर्णय ने विशेष रूप से उन मामलों में बारीकी से जांच की माँग की, जहाँ सरकार ने केवल आरोपियों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त किया, जबकि आसपास के समान अवैध निर्माणों को अनदेखा किया गया।
नया स्पष्टिकरण
जुलाई 2026 में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि "रिपब्लिक के सार्वजनिक स्थानों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण बहुत अधिक हैं, और यह वह क्षेत्र नहीं है जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर प्रयोग पर टिप्पणी की है।" इसका अर्थ यह है कि जब तक नगरपालिका अधिनियमों के तहत नोटिस, सुनवाई और अपील की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक बुलडोजर का प्रयोग वैध माना जाएगा।
व्यक्तिगत अपमान याचिकाओं का प्रावधान
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत अपमान याचिकाओं को अब उनके अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालयों को भेजा जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि प्रत्येक मामले में तथ्य‑जाँच की आवश्यकता होगी, और यह कार्य उच्च न्यायालयों के पास है, जहाँ जिला न्यायिक अधिकारी जमीन पर जाकर वास्तविक स्थिति का निर्धारण करेंगे।
भविष्य के प्रभाव
यह स्पष्टीकरण नगर निगमों और विकास एजेंसियों को दोहरावदार और चयनात्मक विधि‑प्रयोग से बचने की चेतावनी देता है, साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि नियम‑कानून का पालन किया जाए। यदि प्रक्रियात्मक त्रुटियों को नहीं सुधारा गया, तो भविष्य में उच्च न्यायालयों द्वारा बुलडोजर के दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इस दिशा‑निर्देश से नागरिकों को यह भरोसा मिलेगा कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माणों को हटाने के लिये न्यायसंगत प्रक्रिया अपनाई जाएगी।