कर्नाटक में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नवीनीकृत चार रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को वर्चुअल रूप से उद्घाटन करेंगे। कुल निवेश ₹79 करोड़ से अधिक है, जिसमें आधुनिक सुविधाएँ और दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चार स्टेशनों का वर्चुअल उद्घाटन
- कुल लागत ₹79 करोड़ से अधिक, प्रत्येक स्टेशन में अलग‑अलग निवेश
- अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक, सुलभ और क्षेत्रीय वास्तुकला‑प्रेरित सुविधाएँ
कर्नाटक में दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) के सहयोग से अमृत भारत स्टेशन योजना (ABSS) के अंतर्गत चार प्रमुख रेलवे स्टेशनों – अलनवर, बड़ामी, बंटवाल और कोप्पल – का आधुनिकीकरण पूरा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को इन स्टेशनों का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे, जिससे राज्य में सार्वजनिक परिवहन का स्तर नई ऊँचाइयों पर पहुंच जाएगा।
विस्तृत निवेश और विकास कार्य
इन चार स्टेशनों का पुनर्विकास कुल मिलाकर ₹79 करोड़ से अधिक खर्च में किया गया है। अलनवर स्टेशन का खर्च ₹17.2 करोड़, बड़ामी का ₹15.10 करोड़, बंटवाल का ₹26.18 करोड़ और कोप्पल का ₹21.14 करोड़ रहा। इस पुनर्निर्माण में क्षेत्रीय वास्तुशिल्पीय तत्वों को सम्मिलित किया गया है, जिससे यात्रियों को स्थानीय संस्कृति का अनुभव भी मिलता है।
आधुनिक सुविधाएँ और सुलभता
नए स्टेशन भवनों में एयर‑कंडीशन वाले प्रतीक्षा हॉल, महिलाओं के लिए विशेष लीडी रूम, शिशु‑खुराक स्थान, स्वच्छ जल आपूर्ति और विस्तारित पार्किंग जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। दिव्यांगजनों के लिए रैंप, सुलभ बुकिंग काउंटर, मार्गदर्शक पाथवे और विशेष शौचालय स्थापित किए गए हैं। अलनवर, बड़ामी और कोप्पल में 12‑मीटर चौड़े फुट‑ओवरब्रिज, तथा कोप्पल में दो एस्केलेटर भी जोड़े गए हैं।
राष्ट्रव्यापी प्रभाव और भविष्य की दिशा
यह उद्घाटन देशभर में 75 पुनर्विकसित स्टेशनों में से एक है, जहाँ प्रधानमंत्री ने अब तक 1,000 से अधिक स्टेशनों के पुनर्निर्माण की नींव रखी है। कर्नाटक में पहले भी गड़ग, धारण, गोका रोड, मुनीराबाद और बागलकोट जैसे प्रमुख स्टेशन मई 2025 में आधुनिकीकरण किए जा चुके हैं। इन कदमों से न केवल यात्रियों की यात्रा अनुभव में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत अगले वर्षों में और भी कई स्टेशनों को आधुनिक बनाना लक्ष्य है, जिससे भारत की रेल नेटवर्क को विश्व‑स्तर की प्रतिस्पर्धात्मकता मिल सके। कर्नाटक की इस पहल को मॉडल मानते हुए अन्य राज्यों में भी समान परियोजनाओं को तेज़ी से लागू किया जाएगा।