कांग्रेस ने आगामी मानसून सत्र में सीमांकन विधेयक (Delimitation Bill) का कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया है। पार्टी राम मंदिर दान चोरी और पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी में है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कांग्रेस आगामी मानसून सत्र में सीमांकन (Delimitation) विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी।
  • पार्टी राम मंदिर दान की कथित चोरी, इथेनॉल मिश्रण और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बहस की मांग करेगी।
  • कांग्रेस का दावा है कि भाजपा के पास किसी भी संवैधानिक बदलाव के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं है।
  • विपक्ष की एकजुटता बनाए रखने के लिए राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे निरंतर संपर्क में हैं।

नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस संसदीय दल की बैठक के बाद, संचार प्रभारी जयराम रमेश ने स्पष्ट कर दिया है कि विपक्षी दल आगामी मानसून सत्र में सरकार की नीतियों के खिलाफ एक आक्रामक रुख अपनाएंगे। बैठक की अध्यक्षता सोनिया गांधी ने की, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सहित वरिष्ठ सांसद शामिल हुए।

सीमांकन विधेयक और संवैधानिक चुनौती

कांग्रेस का सबसे बड़ा निशाना प्रस्तावित सीमांकन विधेयक (Delimitation Bill) होगा। जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए विपक्षी एकता सुनिश्चित करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार पिछले प्रयासों में इस विधेयक को पारित करने में विफल रही थी। कांग्रेस का तर्क है कि यह विधेयक देश के संघीय ढांचे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है। रमेश ने यह भी जोड़ा कि भाजपा के पास इस तरह के महत्वपूर्ण विधायी बदलावों के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं है, जो सरकार के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है।

विस्फोटक मुद्दे: राम मंदिर से लेकर पेपर लीक तक

मानसून सत्र केवल सीमांकन तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस ने कई संवेदनशील मुद्दों को एजेंडे में शामिल किया है। इनमें राम मंदिर दान की कथित चोरी, इथेनॉल-मिश्रित ईंधन में अनियमितताएं, और हाल के वर्षों में हुए प्रश्नपत्र लीक (Question Paper Leaks) मामले प्रमुख हैं। रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए कहा कि NEET जैसी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।

विपक्ष की एकजुटता और FCRA संशोधन

टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों के कुछ सांसदों के दल बदलने की घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए, रमेश ने इसे संविधान का अपमान बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि कांग्रेस नेतृत्व विपक्षी एकजुटता बनाए रखने के लिए सक्रिय है। इसके अलावा, पार्टी विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों का भी विरोध करने की योजना बना रही है, जिसे वे नागरिक समाज के कार्यों में हस्तक्षेप मान रहे हैं।