केरल के एक स्थानीय भाजपा नेता ने अपने व्यापार के GST नंबर से 3.25 लाख रुपये की फर्जी बिल बनाकर ध्वज आपूर्ति का दावा किया, जिससे पार्टी में बड़ी उलझन पैदा हुई। पार्टी ने मामले की जांच का आश्वासन दिया, जबकि राज्य अध्यक्ष ने कोई अनियमितता नहीं बताई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- BJP के स्थानीय नेता ने फर्जी GST बिल की शिकायत दर्ज की।
- बिल में 3.25 लाख रुपये का झूठा खर्च दिखाया गया, जिसमें 10,000 ध्वजों की आपूर्ति का दावा है।
- पार्टी ने जांच का वादा किया, जबकि राज्य अध्यक्ष ने कोई अनियमितता नहीं बताई।
केरल में भाजपा ने पिछले चुनाव में तीन सीटों पर अपनी सबसे अधिक जीत हासिल की, लेकिन इस जीत के बाद ही चुनावी फंड के दुरुपयोग के आरोप उभरे। स्थानीय नेता प्रमदा चंद्रन ने थिरुवनंतपुरम में थursday को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनके व्यापार के GST नंबर का उपयोग कर 3.25 लाख रुपये का फर्जी बिल तैयार किया गया। इस बिल में बताया गया है कि उनका व्यवसाय दो विधानसभा क्षेत्रों में 10,000 भाजपा ध्वजों की आपूर्ति कर चुका है, जबकि चंद्रन का वास्तविक व्यापार केवल खाद्य तेल की आपूर्ति तक सीमित है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
भाजपा के वमनापुरम विधानसभा क्षेत्र के जनरल सेक्रेटरी चंद्रन ने पहले ही इस मुद्दे को पार्टी के राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के समक्ष उठाया था, लेकिन उन्हें ठोस कार्रवाई नहीं मिली। वह कहते हैं, “मैं वस्त्र या कपड़ा व्यापार नहीं करता, लेकिन मेरे नाम पर ध्वजों की आपूर्ति का बिल सोशल मीडिया पर आया है, इसलिए मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज की।” यह घटना उस समय आई है जब कई राज्यों में चुनावी फंड को फर्जी बिलों और बढ़े हुए खर्चों के माध्यम से गबन करने के आरोप लगे हैं।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा ने तुरंत कहा कि वह “शिकायतों की पूरी जांच करेगा” और “पार्टी की पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है”। वरिष्ठ नेता पी.के. कृष्णदास ने कहा, “हमने अभी तक किसी भी आवाज़ क्लिप या गवाही को नहीं सुना है, और हमें अभियोक्ता फंड से जुड़ी कोई शिकायत नहीं मिली है।” राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी कहा कि “कोई अनियमितता नहीं पाई गई और चुनावी प्रक्रिया के बाद राज्य, जिला और निर्वाचन स्तर पर ऑडिटिंग पूरी हो चुकी है।” उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि “डिसिप्लिनरी कार्रवाई लोकतांत्रिक पार्टी में सामान्य प्रक्रिया है।”
भविष्य की संभावनाएँ
यदि जांच से फर्जी बिल साबित होता है, तो यह केरल में भाजपा की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, विशेषकर जब पार्टी ने हाल ही में राज्य में अपनी सफलता को “केरल मॉडल” के रूप में प्रस्तुत किया है। दूसरी ओर, यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं, तो यह विपक्षी दलों द्वारा किए गए राजनीतिक दावों को कमजोर कर सकता है। इस मुद्दे की जाँच के परिणाम न केवल केरल की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनावी फंड की पारदर्शिता की दिशा तय करेंगे।