कर्नाटक राज्य रिटेल लॉटरी विक्रेताओं संघ ने सरकार से केरल लॉटरी के अवैध बिक्री को रोकने और वैध राज्य लॉटरी योजना को पुनः शुरू करने का आग्रह किया है, जिससे अनुमानित 5,000‑6,000 करोड़ रुपये की आय हो सकती है। उन्होंने लॉटरी विभाग की पुनर्स्थापना की भी मांग की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केरल लॉटरी के अवैध बिक्री को रोकने की तात्कालिक आवश्यकता।
- कर्नाटक राज्य लॉटरी योजना के पुन: परिचय से वार्षिक 5,000‑6,000 करोड़ रुपये की संभावित आय।
- लॉटरी विभाग की पुनर्स्थापना और नियमन के लिए विशेष प्राधिकरण की मांग।
कर्नाटक राज्य रिटेल लॉटरी विक्रेताओं संघ ने बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार से दो मुख्य मांगें रखी हैं: पहले, केरल लॉटरी टिकटों की अवैध बिक्री को तुरंत रोकना; और दूसरा, वैध रूप से नियंत्रित कर्नाटक राज्य लॉटरी योजना को पुनः लागू करना। संघ के संस्थापक राज्य अध्यक्ष सी. रामकृष्ण ने कहा कि अवैध बिक्री के कारण राज्य को संभावित कर राजस्व में हजारों करोड़ों की हानि हो रही है।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
2007 में कर्नाटक सरकार ने एकल अंकों वाली लॉटरी के सामाजिक बुरे प्रभाव को देखते हुए राज्य स्तर पर लॉटरी बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। तब से तीन बार लॉटरी (नियमन) अधिनियम के तहत अधिसूचनाएँ जारी की गईं, लेकिन अवैध रूप से केरल लॉटरी टिकटों की बिक्री बरकरार रही। केरल में चल रही लॉटरी के आकर्षक पुरस्कार और आसान खरीद प्रक्रिया ने कर्नाटक के उपभोक्ताओं को भी आकर्षित किया, जिससे अनियंत्रित बाज़ार बना।
आर्थिक संभावनाएँ और राजस्व प्रभाव
संघ के अनुसार, यदि कर्नाटक सरकार वैध राज्य लॉटरी योजना को पुनः शुरू करती है, तो यह अनुमानित रूप से वार्षिक ₹5,000‑6,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न कर सकती है। यह राशि न केवल राज्य को वित्तीय सुदृढ़ता प्रदान करेगी, बल्कि सामाजिक कल्याण, बुनियादी ढांचा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त फंड भी उपलब्ध कराएगी। साथ ही, वैध लॉटरी संचालन से काला धन और अवैध व्यापार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
नियामक ढांचा और विभागीय पुनर्स्थापना
सी. रामकृष्ण ने लॉटरी विभाग की पुनर्स्थापना की मांग की, जो पहले के समय में लॉटरी संचालन, लाइसेंसिंग, निरीक्षण और कर संग्रह के लिए जिम्मेदार था। एक समर्पित विभाग के बिना, लॉटरी के नियमन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी बनी रहेगी, जिससे अवैध बिक्री फिर से बढ़ सकती है। संघ ने सुझाव दिया कि नया विभाग अत्याधुनिक तकनीक, डिजिटल भुगतान प्रणाली और सतत निगरानी के साथ स्थापित किया जाए।
भविष्य की दिशा
कर्नाटक में लॉटरी की वैधता को लेकर बहस अभी जारी है, परंतु आर्थिक लाभ और सामाजिक नियंत्रण के दृष्टिकोण से स्पष्ट है कि एक नियामक ढांचा अनिवार्य है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को अपनाती है, तो यह न केवल वित्तीय रूप से राज्य को सुदृढ़ करेगा, बल्कि उपभोक्ता सुरक्षा को भी बढ़ावा देगा।