कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड में पेपर लीक मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे 'भविष्य की चोरी' करार देते हुए छात्रों को एकजुट होने का आह्वान किया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • राहुल गांधी ने उत्तराखंड को 'पेपर लीक का केंद्र' बताया।
  • उन्होंने UKSSSC भर्ती परीक्षाओं में धांधली और मेरिट के बजाय 'रेट' पर नौकरी देने का आरोप लगाया।
  • 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत देहरादून में छात्रों को संबोधित करेंगे राहुल गांधी।
  • कांग्रेस ने पेपर लीक को छात्रों के अधिकारों और आजीविका की चोरी करार दिया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड में व्याप्त पेपर लीक घोटाले को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। देहरादून में आयोजित होने वाले 'छात्रों की गूंज' अभियान के पूर्व, गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद भावुक और आक्रामक संदेश साझा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल परीक्षा पत्रों का लीक होना नहीं है, बल्कि यह देश के लाखों युवाओं के भविष्य की सुनियोजित चोरी है।

मेरिट का अंत और 'सिस्टम' का भ्रष्टाचार

राहुल गांधी ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि अब 'पेपर लीक का केंद्र' बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और लेखपाल जैसे महत्वपूर्ण सरकारी पद अब योग्यता (मेरिट) के आधार पर नहीं, बल्कि अपराधियों द्वारा तय की गई 'रेट' के आधार पर बांटे जा रहे हैं। गांधी के अनुसार, सरकार ने नकल रोकने के लिए सख्त कानून तो बनाए, लेकिन भ्रष्टाचार का यह तंत्र पहले से कहीं अधिक गहरा हो गया है।

'छात्रों की गूंज' अभियान और भविष्य की लड़ाई

यह विवाद कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी अभियान 'छात्रों की गूंज' के संदर्भ में आया है, जिसकी शुरुआत जून 2026 में कोटा, राजस्थान से की गई थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य कोचिंग की भारी फीस, मानसिक तनाव, बेरोजगारी और सबसे महत्वपूर्ण रूप से परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों पर छात्रों की आवाज को बुलंद करना है। राहुल गांधी ने छात्रों से अपील की है कि वे इस लड़ाई में उनके साथ आएं ताकि भविष्य की नीलामी को रोका जा सके।

गंभीर सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थ

विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी का यह रुख आगामी चुनावों और छात्र राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब एक शिक्षित युवा वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देता है और अंत में उसे पता चलता है कि उसकी सीट किसी और ने खरीद ली है, तो यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक संकट है। गांधी का यह 'चोरी' वाला तर्क सीधे तौर पर मध्यम वर्ग और गरीब छात्रों की भावनाओं को छूता है, जो बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के दोहरे प्रहार झेल रहे हैं।