पत्ताली मक्कल कटची (पीएमके) के पूर्व विधायक आर. अरुल ने अन्बुमानी रामादोस को नेतृत्व के योग्य नहीं ठहराते हुए नई पार्टी बनाने या मौजूदा दल में शामिल होने का विकल्प सदस्यों को पेश किया। इस बैठक में सलैम जिले को तीन हिस्सों में बाँटने की मांग भी शामिल थी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पीएमके के पूर्व विधायक आर. अरुल ने अन्बुमानी को नेता नहीं मानने की घोषणा की
- सदस्यों को नई पार्टी बनाना या मौजूदा दल में शामिल होना चुनने के लिए शीट दी गई
- सलैम जिले को प्रशासनिक कारणों से तीन भागों में विभाजित करने की मांग पारित हुई
पत्ताली मक्कल कटची (पीएमके) के पूर्व विधायक आर. अरुल ने 16 जुलाई को आयोजित एक बैठक में कहा कि पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष अन्बुमानी रामादोस में नेतृत्व की क्षमता नहीं है। अरुल, जो मूल रूप से पार्टी के संस्थापक डॉ. एस. रामादोस के कट्टर समर्थक रहे हैं, ने अपने अनुयायियों को दो विकल्प प्रस्तुत किए: या तो नई पार्टी बनाना या अन्य मौजूदा दलों में शामिल होना।
बैठक का माहौल और प्रस्ताव
सलेम में आयोजित इस सभा में प्रतिभागियों को एक शीट दी गई, जिस पर उन्होंने अपनी पसंद अंकित की। कुल पाँच प्रस्ताव पारित हुए, जिनमें सबसे प्रमुख था सरकार से अनुरोध कि सलेम जिले को प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए तीन छोटे जिलों में विभाजित किया जाए। यह प्रस्ताव स्थानीय नेताओं और व्यावसायिक वर्ग दोनों की सहमति से आया है, जो जिले की विकासात्मक चुनौतियों को हल करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना गया है।
परिवारिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि
डॉ. एस. रामादोस ने 1990 के दशक में पीएमके की स्थापना की, जो मुख्यतः तमिलनाडु के वैदिक पहचान‑आधारित राजनीति पर केंद्रित था। उनके पुत्र अन्बुमानी ने 2014 में केंद्रीय मंत्री पद संभाला, लेकिन हाल के वर्षों में उनके नेतृत्व शैली को कई मूलभूत समर्थकों द्वारा आलोचना का सामना करना पड़ा। अरुल ने कहा, “डॉ. रामादोस और उनके पुत्र अन्बुमानी की फिर से एकता देखकर खुशी हुई, परन्तु अन्बुमानी ने हमारे मूलभूत समर्थकों को ‘नाली’ कहा, जिससे पार्टी के भीतर गहरी दरार पैदा हुई।”
पीएमके की गिरती लोकप्रियता
पिछले चुनावों में पीएमके के मत प्रतिशत में गिरावट स्पष्ट रूप से दिखाई देती है; 5.2% से घटकर 2.1% तक गिरा है। इस गिरावट का कारण कई कारकों में बाँटा जा सकता है—नेतृत्व संकट, गठबंधन की अस्थिरता, तथा सामाजिक आधार के परिवर्तन। अन्बुमानी के बार‑बार किए गए गठबंधन प्रस्तावों को कई समर्थकों ने अस्वीकार कर दिया, जिससे पार्टी के भीतर वैकल्पिक नेतृत्व की मांग स्पष्ट हुई।
आगे के कदम
आर. अरुल ने कहा कि उन्होंने पिछले 37 वर्षों से डॉ. रामादोस के साथ यात्रा की है, और जब रामादोस ने राजनीति से हाथ हटाया, तो उन्होंने अपने अनुयायियों के साथ एक नई दिशा तय करने के लिए बैठक बुलाई। “हम सभी दलों, जिसमें एआईएडीएमके, डीएमके और वर्तमान में सत्ता में मौजूद टीवीके शामिल हैं, से आमंत्रण प्राप्त कर चुके हैं। हम इस बैठक के परिणामों को गिनते हुए जल्द ही एक स्पष्ट निर्णय लेंगे,” अरुल ने बताया। यह निर्णय तमिलनाडु की राजनीति में नई धारा खोल सकता है, जहाँ कई छोटे‑छोटे गठबंधन और नई दलों का उदय हो रहा है।