DMK ने प्रस्तावित सीमांकन (delimitation) विधेयक पर अभी कोई औपचारिक रुख न अपनाने का निर्णय लिया है। पार्टी केवल बिल के संसद में पेश होने के बाद ही अपना अंतिम निर्णय लेगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- DMK ने कहा कि संसद में बिल पेश होने तक सीमांकन पर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।
- मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने पार्टी सांसदों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
- कांग्रेस पार्टी सीमांकन विधेयक के खिलाफ विपक्षी एकजुटता बनाने की कोशिश कर रही है।
- प्रस्तावित 131वें संविधान संशोधन बिल से लोकसभा सीटों की संख्या 850 तक बढ़ सकती है।
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने प्रस्तावित सीमांकन विधेयक (Delimitation Bill) पर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक रुख अपनाया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्र सरकार इस विधेयक को संसद के पटल पर नहीं रखती, तब तक पार्टी इस संवेदनशील मुद्दे पर अपना कोई औपचारिक स्टैंड नहीं लेगी।
स्टालिन की अध्यक्षता में रणनीतिक बैठक
यह निर्णय मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन द्वारा पार्टी के सांसदों के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है। एक वरिष्ठ सांसद के अनुसार, पार्टी वर्तमान में स्थिति का अवलोकन कर रही है और बिल के वास्तविक स्वरूप को देखे बिना कोई भी कदम उठाना जल्दबाजी होगी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सीमांकन का मुद्दा देश की राजनीति में एक बड़े भूचाल की आहट दे रहा है।
विपक्ष की रणनीति और कांग्रेस की सक्रियता
एक ओर जहां DMK सावधानी बरत रही है, वहीं कांग्रेस इस विधेयक के खिलाफ विपक्षी एकता (INDIA Bloc) को मजबूत करने में जुटी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वे DMK और आम आदमी पार्टी (AAP) सहित सभी विपक्षी दलों के संपर्क में हैं। कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा सरकार 2024 के चुनावों में 400 सीटों का लक्ष्य हासिल करने में विफल रहने के बाद अब संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
दक्षिण भारत और जनसंख्या नियंत्रण का संकट
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमांकन का असली उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों का हेरफेर (Gerrymandering) करना हो सकता है। सबसे बड़ा डर यह है कि जिन दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त की है, उनकी राजनीतिक शक्ति और लोकसभा में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। यदि सीटों का पुनर्वितरण केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो यह उन राज्यों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया है।
संसद सत्र और भविष्य की राह
आगामी मानसून सत्र, जो 20 जुलाई से शुरू होने वाला है, इस विधेयक के कारण काफी हंगामेदार होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार द्वारा 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पेश किए जाने की संभावना है, जो लोकसभा की सीटों की संख्या को बढ़ाकर 850 कर सकता है। अब सबकी नजरें DMK के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो इस राजनीतिक गणित को पूरी तरह बदल सकता है।