कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संशोधित परिसीमन (delimitation) विधेयक पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने संशोधित परिसीमन विधेयक पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक की मांग की है।
  • सरकार 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए नया विधेयक ला सकती है।
  • दक्षिण भारतीय राज्यों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने की आशंका के बीच यह मुद्दा संवेदनशील बना हुआ है।
  • पिछला (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं पा सका था।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर आगामी मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले संशोधित परिसीमन (Delimitation) विधेयक पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया है। खड़गे का यह कदम उस समय आया है जब केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने के लिए नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर रही है।

विवाद की जड़: परिसीमन और महिला आरक्षण

वर्तमान कानूनों के अनुसार, महिला आरक्षण का कार्यान्वयन 2034 से पहले संभव नहीं है क्योंकि यह प्रक्रिया 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ी है। हालांकि, सरकार का लक्ष्य 2029 के चुनावों तक इसे लागू करना है। इसके लिए सरकार लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने पर विचार कर रही है। खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि राजनीतिक दलों को इन प्रस्तावों का गहराई से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

दक्षिण भारत की राजनीतिक चिंताएं

परिसीमन का यह मुद्दा केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के संघीय ढांचे से भी जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक वृद्धि करने के तरीकों पर विचार कर रही है ताकि दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को दूर किया जा सके। दक्षिण के राज्यों को डर है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनका राजनीतिक प्रभाव और लोकसभा में उनकी शक्ति कम हो सकती है।

विधेयक की विफलता और राजनीतिक गणित

गौरतलब है कि 17 अप्रैल, 2026 को पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा था। वर्तमान में एनडीए के पास लगभग 300 सांसद हैं, जबकि दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोटों की आवश्यकता है। खड़गे ने याद दिलाया कि उन्होंने पहले भी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को इस संबंध में पत्र लिखे थे, लेकिन उनकी मांगों को अनसुना कर दिया गया था।