कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगामी मानसून सत्र से पहले संशोधित परिसीमन विधेयक पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने विपक्ष को अध्ययन के लिए पर्याप्त समय देने और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया।
- कांग्रेस ने संशोधित परिसीमन प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय की मांग की है।
- विपक्ष ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के सरकार के कदम का विरोध किया है।
- अप्रैल 2026 में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में बहुमत हासिल करने में विफल रहा था।
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में आगामी मानसून सत्र से पहले 'परिसीमन' (Delimitation) का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर मांग की है कि सरकार द्वारा संशोधित परिसीमन विधेयक को संसद में पेश करने से पहले एक व्यापक 'सर्वदलीय बैठक' (All-Party Meeting) बुलाई जाए।
विधेयक की पृष्ठभूमि और राजनीतिक गतिरोध
गौरतलब है कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, जिसका उद्देश्य परिसीमन प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त करना था, 17 अप्रैल को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा था। खड़गे ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष को सरकार के नए और संशोधित प्रस्तावों को गहराई से समझने और उन पर प्रतिक्रिया देने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने मार्च और अप्रैल के दौरान संसदीय मामलों के मंत्री को इस संबंध में कई बार लिखने का प्रयास किया था, लेकिन उनकी मांगों को अनसुना कर दिया गया।
कांग्रेस की रणनीति और विपक्ष की एकजुटता
कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार मानसून सत्र (20 जुलाई से 13 अगस्त) के दौरान इस विधेयक को दोबारा पेश करती है, तो पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी। कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक में, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गांधी ने की, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर रणनीति तैयार की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों में फूट डालने की कोशिश कर रही है ताकि आवश्यक संख्या बल जुटाया जा सके।
महिला आरक्षण बनाम परिसीमन का विवाद
इस राजनीतिक खींचतान का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला आरक्षण है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वे महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन उसका विरोध तब करेंगे जब इसे परिसीमन के साथ जोड़ा जाएगा। विपक्ष की चिंता यह है कि परिसीमन के कारण राज्यों के बीच संसदीय प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे कुछ राज्यों को अधिक शक्ति मिल सकती है और कुछ को कम। सरकार का लक्ष्य लोकसभा की शक्ति को लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ाना है, जो एक अत्यंत संवेदनशील संवैधानिक मुद्दा बन गया है।