कांग्रेस ने नीट-यूजी विवाद को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन के 19वें दिन उन्हें अपना समर्थन दिया है। सोनिया गांधी की पहल पर लिए गए इस फैसले के पीछे 1984 का एक ऐतिहासिक संदर्भ भी जुड़ा हुआ है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को कांग्रेस ने 19वें दिन अपना समर्थन दिया।
- सोनिया गांधी ने 1984 में इंदिरा गांधी द्वारा वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल के अनशन को समाप्त कराने के वाकये का हवाला दिया।
- जंतर-मंतर पर सपा सांसद डिंपल यादव के आगमन के दौरान उन्हें गलती से 'डिंपल कपाड़िया' पुकारे जाने से माहौल हल्का हुआ।
- जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने गंगा किनारे के गांवों में पीएम मोदी के संदेश वाली कॉपियां बांटकर जल संरक्षण अभियान शुरू किया।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी राजनीतिक हलचल के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस पार्टी ने नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अपना औपचारिक समर्थन दे दिया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने प्रदर्शन स्थल पर जाकर वांगचुक से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस गंभीर मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर नरेंद्र मोदी सरकार को घेरेगी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को पुरजोर तरीके से उठाएगी।
सोनिया गांधी का हस्तक्षेप और 1984 का ऐतिहासिक संदर्भ
पार्टी सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में कांग्रेस के भीतर एक धड़ा वांगचुक के इस आंदोलन में सीधे तौर पर शामिल होने को लेकर थोड़ा संकोच कर रहा था। लेकिन कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट किया। सोनिया गांधी ने नेताओं को 1984 का वह ऐतिहासिक वाकया याद दिलाया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद लेह (लद्दाख) का दौरा किया था। उस समय सोनम वांगचुक के पिता, सोनम वांग्याल लद्दाखियों के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) के दर्जे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। इंदिरा गांधी ने उनसे मुलाकात कर उनका अनशन तुड़वाया था। सोनिया गांधी ने इसी विरासत का हवाला देते हुए पार्टी को वांगचुक के साथ खड़े होने के निर्देश दिए।
जंतर-मंतर पर हंसी का पल: जब डिंपल बनीं 'डिंपल कपाड़िया'
गंभीर और तनावपूर्ण माहौल के बीच जंतर-मंतर पर एक मजेदार वाकया भी देखने को मिला। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव जब अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ सोनम वांगचुक से मिलने मंच की ओर बढ़ रही थीं, तो मंच संचालक ने उत्साह में आकर उन्हें गलती से "युवा सांसद डिंपल कपाड़िया" कहकर संबोधित कर दिया। इस मानवीय भूल को भीड़ ने तुरंत सुधारा, जिसके बाद संचालक ने अपनी गलती सुधारते हुए कई बार उनका सही नाम लिया। इस घटना से वहां मौजूद प्रदर्शनकारी छात्रों और नेताओं के चेहरे पर मुस्कान तैर गई और माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया।
जल संरक्षण की अनूठी पहल: बच्चों तक पहुंच रही है सरकार
दूसरी तरफ, सरकार के स्तर पर भी एक नई पहल शुरू की गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने स्कूली बच्चों के बीच जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे बसे गांवों के बच्चों को मुफ्त कॉपियां (नोटबुक) बांटी जा रही हैं। इन कॉपियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ जल संरक्षण का संदेश अंकित है। इस अभियान में विशेष रूप से पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सके।