दिवंगत मुख्यमंत्री के. कामराज की जयंती समारोह के दौरान तिरुनेलवेली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी ने अनुशासनहीनता के लिए संबंधित पदाधिकारियों से जवाब मांगा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तिरुनवेली में के. कामराज की 124वीं जयंती समारोह के दौरान विवाद हुआ।
  • पूर्व जिला अध्यक्ष शंकरपांडियन और पूर्व पार्षद उमापति शिवन के बीच धक्का-मुक्की हुई।
  • विवाद के कारण 'कामराज जन्म जयंती शपथ' समारोह को बीच में ही रोकना पड़ा।
  • तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी ने पार्टी की छवि खराब करने के लिए दोनों से स्पष्टीकरण मांगा है।

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में बुधवार, 15 जुलाई 2026 को आयोजित एक कार्यक्रम में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कांग्रेस पार्टी के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई। यह घटना महान नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज की 124वीं जयंती मनाने के लिए आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान हुई, जिससे पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों और अनुशासनहीनता का मामला सार्वजनिक हो गया।

विवाद का मुख्य कारण

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, Kokkirakulam स्थित पार्टी कार्यालय के सामने तिरुनेलवेली के सांसद सी. रॉबर्ट ब्रूस कार्यकर्ताओं को 'पेरुन्थलवार कामराज जन्म जयंती शपथ' दिला रहे थे। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री आर. धनुषकोडी आथिथण जैसे प्रमुख नेता भी उपस्थित थे। जैसे ही मीडियाकर्मी और यूट्यूब चैनल कवरेज के लिए तैयार हुए, पार्टी के भीतर 'कैमरा एंगल' और दृश्यता को लेकर विवाद शुरू हो गया।

बताया जा रहा है कि पूर्व तिरुनेलवेली जिला कांग्रेस अध्यक्ष के. शंकरपांडियन ने पूर्व निगम पार्षद उमापति शिवन और अन्य सदस्यों से सही ढंग से खड़े होने को कहा ताकि वे भी कैमरों में दिखाई दे सकें। जब उनकी बात नहीं मानी गई, तो शंकरपांडियन ने उमापति शिवन को धक्का दे दिया, जिससे देखते ही देखते मामला हाथापाई में बदल गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि शांति बनाए रखने के लिए शपथ ग्रहण समारोह को अचानक रोकना पड़ा।

पार्टी की कार्रवाई और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर प्रसारित होने के बाद, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने शंकरपांडियन और उमापति शिवन दोनों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है, क्योंकि इस घटना ने सार्वजनिक रूप से पार्टी की छवि को धूमिल किया है।

दूसरी ओर, इस घटना ने सामाजिक रंग भी ले लिया है। शैव वेलाार संगम द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में उमापति शिवन के समर्थन में कहा गया कि वे समुदाय के सदस्यों पर इस तरह के हमलों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह घटना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है कि कैसे एक जयंती समारोह अनुशासनहीनता का केंद्र बन गया।