महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के बीच पुणे में NCP और BJP के गठबंधन में तनाव देखा जा रहा है। NCP ने आरोप लगाया है कि BJP उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजरअंदाज कर रही है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पुणे में NCP और BJP के बीच गठबंधन में तनाव बढ़ रहा है।
  • NCP ने आरोप लगाया कि BJP ने पालकी समारोह के होर्डिंग्स में उन्हें शामिल नहीं किया।
  • स्थानीय स्तर (PMC) पर दोनों दलों के साथ आने की संभावना फिलहाल कम है।
  • Sunetra Pawar के उपमुख्यमंत्री होने के बावजूद NCP खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक तरफ जहाँ राज्य स्तर पर NCP और BJP मिलकर सरकार चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुणे के स्थानीय स्तर पर इस गठबंधन में गहरी दरारें दिखने लगी हैं। हालिया घटनाक्रमों ने संकेत दिया है कि गठबंधन के साथी होने के बावजूद, पुणे में NCP खुद को हाशिए पर महसूस कर रही है।

पालकी समारोह और होर्डिंग्स का विवाद

विवाद की शुरुआत तब हुई जब पुणे में पालकी समारोह के स्वागत के लिए शहर भर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए। NCP नेताओं का आरोप है कि इन विज्ञापनों में केवल प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis की तस्वीरें थीं, जबकि पार्टी प्रमुख और पुणे की संरक्षक मंत्री Sunetra Pawar को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। पुणे नगर निगम (PMC) में विपक्ष के नेता Nilesh Nikam ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक प्रतीकात्मक मुद्दा नहीं है, बल्कि गठबंधन में सम्मान की कमी को दर्शाता है।

स्थानीय सत्ता और श्रेय की राजनीति

NCP नेताओं का कहना है कि जब भी पुणे नगर निगम में कोई बड़ा निर्णय लिया जाता है, तो BJP राज्य और राष्ट्रीय गठबंधन का हवाला देकर समर्थन मांगती है, लेकिन जब उन निर्णयों की सफलता का श्रेय लेने की बात आती है, तो NCP को किनारे कर दिया जाता है। हाल ही में पूर्व राज्यसभा सांसद Sanjay Kakade के बयानों ने भी इस आग में घी डालने का काम किया है, हालांकि शहर के NCP प्रमुख Sunil Tingre ने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर गठबंधन करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है।

गठबंधन का भविष्य और राजनीतिक निहितार्थ

यह तनाव ऐसे समय में उभर रहा है जब महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता का समीकरण बदल रहा है। Ajit Pawar के निधन के बाद Sunetra Pawar के नेतृत्व में NCP अपनी पहचान और शक्ति को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। यदि पुणे जैसे महत्वपूर्ण नगर निगम में यह खींचतान जारी रहती है, तो आगामी स्थानीय चुनावों में इसका सीधा असर गठबंधन की एकजुटता पर पड़ सकता है।