पूर्व तृणमूल कांग्रेस मंत्री मदान मिश्रा ने विरोधी नेता रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही टीएमसी समूह में शामिल होकर बड़ा राजनीतिक शॉक पैदा किया। यह कदम उसी समय आया जब प्रवर्तन निदेशालय ने उनके परिवार को भर्ती घोटाले के संबंध में पूछताछ के लिए बुलाई थी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मदान मिश्रा ने रिताब्रता बनर्जी के विद्रोही टीएमसी गुट में शामिल हुए।
- ईडी ने उनके परिवार को भर्ती घोटाले के संबंध में पूछताछ के लिए बुलाई।
- यह परिवर्तन पश्चिम बंगाल की राजनीति में शक्ति संतुलन को पुनः परिभाषित कर सकता है।
मदान मिश्रा, जिन्हें माँता दास की "रंगीन लड़का" के रूप में जाना जाता था, ने बुधवार को औपचारिक रूप से रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) गुट में कदम रख लिया। यह कदम राजनीतिक समीक्षक और पार्टी के भीतर के समीक्षकों दोनों के लिए आश्चर्यजनक रहा, क्योंकि मिश्रा को माँता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सेनाओं में से एक माना जाता था।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक उन्नति
1970 के दशक में प्रीयारंजन दासमुंशी के करीबी सहयोगी के रूप में शुरू हुई मिश्रा की राजनीति, 1990 के दशक में दक्षिण कोलकाता में कांग्रेस का मजबूत आयोजक बन गई। उन्होंने टैक्सी ड्राइवर संघ, सेंट्रल सरकारी अस्पताल (एसएसकेएम) के स्टाफ यूनियन और स्थानीय युवा क्लबों के साथ गहरा संबंध स्थापित किया, जिससे वह जनसंख्या के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हुए। 1998 में माँता ने एआईटीसी की स्थापना की तो मिश्रा तुरंत ही संस्थापक सदस्य बन गए और 2000 में पार्टी के महासचिव तथा 2004 में तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त हुए।
संसदीय यात्रा और विवाद
2011 में कमरहाटी से पहली बार विधानसभा में प्रवेश करने के बाद, मिश्रा ने खेल, युवा मामलों और परिवहन सहित कई महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो संभाले। 2014 में सरधा चिट फंड घोटाले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उनका करियर ठहर गया; 27 महीने की जेल के बाद 2016 में बेजोर्ड हो गए। तब भी उन्होंने 2021 और 2026 के चुनावों में दो बार जीत हासिल की, जिससे उनका वोट शेयर 43.71% तक पहुंच गया।
वर्तमान में ईडी की जांच और पार्टी से दूरहट
प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में उनके परिवार के सदस्यों को नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़ी पूछताछ के लिए बुलाया। यह कार्रवाई मिश्रा के विद्रोही गुट में शामिल होने के एक दिन बाद हुई, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह कदम व्यक्तिगत सुरक्षा या पार्टी की आंतरिक शक्ति संघर्ष से प्रेरित था। मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से माँता को अभिषेक बनर्जी को पार्टी में अत्यधिक अधिकार देने का आरोप लगाया और कहा कि "मैं ऐसे पार्टी में काम नहीं कर सकता जहाँ केवल एक व्यक्ति का राज हो"।
राजनीतिक प्रभाव
मदान मिश्रा का प्रस्थान टीएमसी के भीतर एक और संभावित विभाजन की चेतावनी देता है। रिताब्रता बनर्जी के गुट को अब एक अनुभवी विधायक और बड़े पैमाने पर लोकप्रिय चेहरा मिला है, जो विरोधी दलों को चुनौती देने में मदद कर सकता है। इस परिवर्तन से पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों में गठबंधन की गतिशीलता पुनः आकार ले सकती है, और माँता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के भीतर सत्ता का पुनर्वितरण हो सकता है।
संपादक टिप्पणी: मदान मिश्रा का इस कदम से न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बल्कि पार्टी के भीतर गहरी वैरता को उजागर किया है। उनका विद्रोही गुट में शरण लेना, यदि सफल रहता है, तो तृणमूल कांग्रेस के भविष्य को पुनः परिभाषित कर सकता है और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिदृश्य में नई संतुलन की लहर ला सकता है।