रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने कार डीलर को निर्देश दिया है कि वह एक पीड़ित डॉक्टर को नई E20 ईंधन अनुकूल कार प्रदान करे और ₹1 लाख का मुआवजा दे। मारुति सुजुकी ने इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- रायपुर उपभोक्ता आयोग ने डॉक्टर की मारुति ग्रैंड विटारा को E20 अनुकूल मॉडल से बदलने का आदेश दिया।
- मानसिक उत्पीड़न और सेवा में कमी के लिए शिकायतकर्ता को ₹1 लाख का मुआवजा देने का निर्देश।
- मारुति सुजुकी ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि कार E20 अनुकूल है और वे फैसले को चुनौती देंगे।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ग्राहक अधिकारों के संरक्षण में एक बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने एक स्थानीय कार डीलर को आदेश दिया है कि वह शहर के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर को नई E20 पेट्रोल-अनुकूलित कार प्रदान करे। इसके साथ ही, बार-बार कार खराब होने के कारण मानसिक प्रताड़ना झेलने के लिए शिकायतकर्ता को ₹1 लाख का हर्जाना देने का भी निर्देश दिया गया है।
यह मामला रायपुर के प्रसिद्ध नेफ्रोलॉजिस्ट 41 वर्षीय डॉ. प्रेमराज देबता से जुड़ा है, जिन्होंने जून 2024 में ₹18.29 लाख की लागत से मारुति ग्रैंड विटारा हाइब्रिड जेटा खरीदी थी। महज पांच महीने बाद और लगभग 21,913 किलोमीटर चलने के बाद कार के इंजन में गंभीर खराबी आने लगी। जब वे कार को शोरूम ले गए, तो उन्हें बताया गया कि मिलावटी पेट्रोल के कारण इंजन खराब हुआ है। डीलर ने वारंटी देने से इनकार करते हुए उपभोक्ता को पुराने पार्ट्स बदलने के लिए भारी-भरकम राशि देने या कम दाम में कार बेचने का अनुचित विकल्प दिया।
उपभोक्ता आयोग की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता को बेची गई कार वास्तव में 17 महीने पुरानी थी और वह E20 ईंधन के अनुकूल नहीं थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब देश में E20 ईंधन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, तो ऐसे में गैर-अनुकूलित इंजन में खराबी आना स्वाभाविक था। इस खराबी पर उपभोक्ता का कोई नियंत्रण नहीं था, और डीलर द्वारा पुराना मॉडल बेचना सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
मारुति सुजुकी का पक्ष और कानूनी कदम
आयोग ने अपने आदेश में डीलर को 45 दिनों के भीतर नई E20 अनुकूल कार देने का निर्देश दिया है, ऐसा न करने पर पूरी राशि वापस करनी होगी। दूसरी ओर, कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह कार पूरी तरह से E20 अनुकूल थी और ईंधन में मिलावट के स्पष्ट सबूत मिले हैं। कंपनी ने इस फैसले को त्रुटिपूर्ण बताते हुए इसे उचित कानूनी मंच पर चुनौती देने की बात कही है।
हरित ईंधन संक्रमण और ऑटोमोबाइल उद्योग
भारत में हरित ईंधन (Ethanol Blending) की ओर बढ़ते कदमों के बीच यह मामला ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक बड़ा सबक है। एथेनॉल-मिश्रित ईंधन (E20) के तेजी से होते विस्तार के बीच वाहन निर्माताओं और डीलरों को उपभोक्ताओं के प्रति पूरी तरह पारदर्शी होना होगा, ताकि तकनीकी और कानूनी विवादों से बचा जा सके।