उत्तराखंड की सिलक्यारा-बरकोट सुरंग में एक दर्दनाक हादसा हुआ है, जहाँ कंक्रीट की स्लैब गिरने से झारखंड के एक 21 वर्षीय श्रमिक की जान चली गई। यह घटना उस सुरंग में हुई है जो 2023 के ऐतिहासिक बचाव अभियान के लिए जानी जाती है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- उत्तराखंड की सिलक्यारा-बरकोट सुरंग में निर्माण कार्य के दौरान हादसा हुआ।
- झारखंड के एक 21 वर्षीय श्रमिक की कंक्रीट स्लैब गिरने से मौत हो गई।
- प्रशासन ने सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की जांच के आदेश दिए हैं।
- यह वही सुरंग है जहाँ 2023 में 41 श्रमिकों का सफल रेस्क्यू किया गया था।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। सिलक्यारा-बरकोट सुरंग के भीतर निर्माण कार्य के दौरान गुरुवार तड़के एक बड़ा हादसा हो गया। एक कंक्रीट लाइनिंग का हिस्सा अचानक गिर गया, जिसकी चपेट में आने से झारखंड के एक 21 वर्षीय श्रमिक की दर्दनाक मौत हो गई।
हादसे का विवरण और प्रशासनिक कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसा बरकोट की ओर से सिलक्यारा सुरंग के लगभग 900 मीटर भीतर हुआ। घटना सुबह करीब 2 बजे की है, जब श्रमिक सुरंग के भीतर आवाजाही कर रहा था। कंक्रीट का एक भारी ब्लॉक सीधे उसके गले पर आ गिरा। घायल श्रमिक को तुरंत नौगाँव अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
उत्तरकाशी के जिला मजिस्ट्रेट प्रशांत आर्य ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने उप-जिलाधिकारी (SDM) बरकोट को घटना की विस्तृत जांच करने, दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने और यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि क्या कार्यान्वयन एजेंसी ने निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया था। साथ ही, मृतक के परिवार को उचित मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
NHIDCL और सुरक्षा पर सवाल
इस परियोजना को लागू करने वाली एजेंसी, नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) ने भी मामले का संज्ञान लिया है। एजेंसी ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और एक तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान निरंतर निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा कवच अनिवार्य हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: 2023 का रेस्क्यू ऑपरेशन
यह हादसा उस स्थान पर हुआ है जो पहले भी सुर्खियों में रहा है। साल 2023 में, इसी सिलक्यारा-बरकोट सुरंग में एक हिस्सा ढह जाने के कारण 41 श्रमिक 17 दिनों तक अंदर फंसे रहे थे। उस समय दुनिया भर का ध्यान इस बचाव अभियान पर था, जिसे अंततः एक बड़ी सफलता के रूप में देखा गया था।
बता दें कि 4.5 किलोमीटर लंबी यह सुरंग चार धाम यात्रा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ₹853 करोड़ की लागत से बन रही यह सुरंग गंगोत्री और यमुनोत्री के बीच की दूरी को 26 किमी कम कर देगी, जिससे यात्रा का समय 50 मिनट से घटकर मात्र 5 मिनट रह जाएगा।