तमिलनाडु के कृषि मंत्री आर. विनोद ने कर्नाटक द्वारा पानी देने से असमर्थता जताने के बाद कहा है कि राज्य सरकार अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए कावेरी जल का उचित हिस्सा हासिल करने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाएगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तमिलनाडु ने कर्नाटक के कम बारिश और कम जलाशय स्तर के दावों के बीच कावेरी जल पर अपना कानूनी अधिकार जताया।
  • कृषि मंत्री आर. विनोद ने बजट पूर्व परामर्श बैठक में किसानों की आजीविका की रक्षा करने का पूर्ण आश्वासन दिया।
  • कावेरी जल विवाद एक बार फिर दोनों राज्यों के बीच मानसून की कमी के कारण तनाव का मुख्य कारण बनता दिख रहा है।

तमिलनाडु के कृषि और किसान कल्याण मंत्री आर. विनोद ने वेल्लोर में आयोजित एक परामर्श बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य सरकार कर्नाटक से कावेरी जल का अपना उचित हिस्सा प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बयान कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के उस हालिया बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कम बारिश और जलाशयों में पानी की कमी का हवाला देते हुए तमिलनाडु को पानी देने में असमर्थता व्यक्त की थी।

कावेरी नदी जल विवाद दशकों पुराना है, जो तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कृषि और पेयजल आपूर्ति को लेकर तनाव का मुख्य कारण रहा है। सर्वोच्च न्यायालय और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के दिशा-निर्देशों के बावजूद, मानसून की कमी के वर्षों में यह संकट गहरा जाता है। तमिलनाडु के डेल्टा क्षेत्र के किसान पूरी तरह से कावेरी के पानी पर निर्भर हैं, और पानी की समय पर अनुपलब्धता से उनकी खड़ी फसलें नष्ट होने की कगार पर पहुंच जाती हैं।

कृषि बजट और क्षेत्रीय मांगें

वेल्लोर में आयोजित तीन घंटे लंबी इस परामर्श बैठक में चेंगलपट्टू, कुड्डालोर, तिरुवल्लुर, कांचीपुरम, तिरुवन्नामलाई, रानीपेट और तिरुपत्तूर सहित आठ पड़ोसी जिलों के किसानों ने भाग लिया। बैठक में आगामी कृषि बजट को लेकर गहन चर्चा हुई, जिसमें किसानों ने आम की खेती के लिए फ्रूट पल्प (फलों के गूदे) प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, पर्याप्त धान खरीद केंद्रों और डेयरी किसानों के लिए मुफ्त मवेशी जैसी प्रमुख मांगें रखीं।

आधुनिकीकरण और जल प्रबंधन पर जोर

मंत्री विनोद ने जोर देकर कहा कि कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम कर रही है। इनमें खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा देना, नई तकनीकों का क्रियान्वयन, सिंचाई के लिए जल का कुशल उपयोग, जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना शामिल है। इन पहलों का उद्देश्य किसानों की आय दोगुनी करना और जल संकट के प्रतिकूल प्रभावों को कम करना है।

इस संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ विचार-विमर्श के बाद तमिलनाडु सरकार कर्नाटक से पानी छुड़वाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर उचित कदम उठाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य के किसानों के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।