कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) द्वारा कृषि अधिकारी पदों के लिए निजी विश्वविद्यालय के छात्रों और इंजीनियरिंग स्नातकों को अनुमति देने के फैसले के खिलाफ शिवमोगा में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- KEA ने कृषि अधिकारी (AO) और सहायक कृषि अधिकारी (AAO) पदों के लिए निजी विश्वविद्यालय के छात्रों और बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरों को आवेदन की अनुमति दी है।
- शिवमोगा के केलडी शिवप्पा नायक कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।
- छात्रों की मांग है कि केवल ICAR द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों के स्नातकों को ही अवसर दिया जाए।
- विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा।
कर्नाटक के शिवमोगा में कृषि शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। केलेडी शिवप्पा नायक कृषि एवं उद्यान विज्ञान विश्वविद्यालय (KSNUAHS) के छात्रों ने कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) द्वारा जारी हालिया भर्ती अधिसूचना के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि KEA का यह निर्णय उनके भविष्य और कृषि क्षेत्र की विशेषज्ञता के साथ खिलवाड़ है।
विवाद की जड़: कौन है पात्र?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब KEA ने कृषि अधिकारी (AO) और सहायक कृषि अधिकारी (AAO) के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए। अधिसूचना में एक ऐसा प्रावधान शामिल किया गया जिसमें राय टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (एक निजी विश्वविद्यालय) से B.Sc. (कृषि) की डिग्री प्राप्त छात्रों और बायोटेक्नोलॉजी में बी.ई. (B.E.) डिग्री धारकों को भी इन पदों के लिए पात्र माना गया है।
विशेषज्ञता बनाम डिग्री का संघर्ष
प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है कि कृषि अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए गहन कृषि ज्ञान की आवश्यकता होती है, जिसमें फसल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और कीट नियंत्रण जैसे विषय शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि इंजीनियरिंग स्नातक (बायोटेक्नोलॉजी) के पास इन व्यावहारिक कृषि कौशलों का वह गहन प्रशिक्षण नहीं होता है जो राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध कृषि महाविद्यालयों के छात्रों के पास होता है।
ICAR मान्यता पर जोर
छात्रों ने मांग की है कि KEA को अपनी अधिसूचना वापस लेनी चाहिए और केवल उन्हीं उम्मीदवारों को अनुमति देनी चाहिए जिन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों से डिग्री प्राप्त की है। छात्रों का मानना है कि निजी विश्वविद्यालयों और इंजीनियरिंग स्नातकों को शामिल करने से सरकारी कृषि सेवाओं में गुणवत्ता प्रभावित होगी और पारंपरिक कृषि छात्रों के अवसर कम हो जाएंगे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने डीन (कृषि) एच.के. वीरन्ना को एक ज्ञापन भी सौंपा है।