आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने ई20 पेट्रोल की अनिवार्यता के खिलाफ एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है, जिस पर 82,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। याचिका में कम माइलेज, वाहनों को नुकसान और ईंधन के चयन की स्वतंत्रता की मांग की गई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने ई20 (E20) पेट्रोल की अनिवार्यता के खिलाफ ऑनलाइन अभियान शुरू किया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित इस याचिका पर 82,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज कराया।
  • उपभोक्ताओं ने शुद्ध पेट्रोल और ई20 के बीच चयन का अधिकार देने और ई20 की कीमतें कम करने की मांग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने देश में ई20 (E20) पेट्रोल की अनिवार्यता के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक ऑनलाइन याचिका साझा करते हुए वाहन चालकों से इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित इस याचिका पर अब तक 82,000 से अधिक लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं, जो इस मुद्दे पर जनता के बीच बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।

उपभोक्ताओं की मुख्य चिंताएं और मांगें

याचिका में मुख्य रूप से दो बड़ी चिंताएं उठाई गई हैं—वाहनों की उम्र और उनके प्रदर्शन पर पड़ने वाला बुरा असर, और ईंधन की दक्षता। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ई20 पेट्रोल (जिसमें 20% इथेनॉल मिलाया जाता है) का कैलोरी मान (calorific value) पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में कम होता है, जिससे वाहनों का माइलेज काफी घट जाता है। इसके अलावा, पुराने इंजनों में इथेनॉल के उपयोग से जंग लगने और इंजन खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

पर्यावरण नीति बनाम उपभोक्ता अधिकार

केंद्र सरकार की जैव ईंधन (biofuel) रणनीति के तहत देश भर में ई20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और कार्बन उत्सर्जन में कटौती करना है। हालांकि, सरकार की इस पर्यावरण-अनुकूल पहल को व्यावहारिक धरातल पर उपभोक्ताओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे कम माइलेज देने वाले ईंधन के लिए भी उतनी ही कीमत चुका रहे हैं, जो आर्थिक रूप से उनके साथ अन्याय है।

चयन की स्वतंत्रता की मांग

याचिका में मांग की गई है कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को 'शुद्ध पेट्रोल' और 'ई20 पेट्रोल' के बीच चयन करने का विकल्प दिया जाना चाहिए। किसी भी उपभोक्ता को ऐसा ईंधन खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए जो उनके वाहन के जीवनकाल को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके साथ ही, ई20 पेट्रोल की कम ऊर्जा दक्षता को देखते हुए इसकी कीमतों में भी आनुपातिक कटौती की मांग की गई है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह

भारत जैसे विकासशील देश में, जहां एक बड़ी आबादी पुरानी गाड़ियों का इस्तेमाल करती है, अचानक से ई20 को अनिवार्य करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ऑटोमोबाइल निर्माता सभी श्रेणियों के वाहनों को इथेनॉल-अनुकूल नहीं बना देते, तब तक उपभोक्ताओं को वैकल्पिक ईंधन का विकल्प मिलना ही चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के प्रयास जनहित और उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी करके सफल नहीं हो सकते।