चिकमगलुरु पुलिस ने वित्तीय लाभ का लालच देकर लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) खोलने और उनका उपयोग अवैध लेनदेन के लिए करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • चिकमगलुरु पुलिस ने छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया है जो 'म्यूल अकाउंट' का संचालन कर रहे थे।
  • आरोपियों ने लोगों को वित्तीय लाभ का लालच देकर उनके दस्तावेज़ों का उपयोग करके बैंक खाते खुलवाए।
  • इन खातों का उपयोग क्रिकेट सट्टेबाजी और अन्य अवैध वित्तीय गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
  • पुलिस अब बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता और अन्य राज्यों में इस गिरोह के नेटवर्क की जांच कर रही है।

कर्नाटक के चिकमगलुरु में साइबर, आर्थिक और नशीली दवाओं (CEN) पुलिस ने एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामले का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने छह व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने आम लोगों को आर्थिक लाभ का झांसा देकर उनके नाम पर IndusInd Bank में 'म्यूल अकाउंट' (Mule Accounts) खोले और फिर उन खातों का उपयोग अवैध धन के हस्तांतरण के लिए किया।

धोखाधड़ी का तरीका और खुलासा

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब शहर के एक ऑटो रिक्शा चालक, आनंद एन. ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आनंद के अनुसार, उसके रिश्तेदार प्रशांत और अन्य साथियों ने 2023 में उसे वित्तीय लाभ का वादा करके बैंक खाता खोलने के लिए राजी किया था। जांच में सामने आया कि केवल आनंद ही नहीं, बल्कि उसके पड़ोस के कई अन्य लोगों ने भी इसी तरह के लालच में आकर अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज़ आरोपियों को सौंप दिए थे।

हैरानी की बात यह है कि खाता खुलने के बाद पीड़ितों को न तो कोई पासबुक मिली, न ही एटीएम कार्ड या कोई अन्य बैंकिंग दस्तावेज़। हाल ही में जब इन लोगों को पता चला कि उनके नाम पर खोले गए खातों में करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हो रहा है, तो वे दहशत में आ गए। पता चला कि इन खातों का उपयोग विभिन्न आपराधिक मामलों और अवैध वित्तीय लेन-देन में किया जा रहा था।

पुलिस जांच और गिरोह का नेटवर्क

चिकमगलुरु के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार दयामा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में प्रशांत, राहुल, संजय, असलम, चेतन और शरत शामिल हैं। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार क्रिकेट सट्टेबाजी या किसी अन्य संगठित अपराध से जुड़े हैं।

पुलिस अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के मामले केवल चिकमगलुरु तक सीमित नहीं हैं; शिवमोग्गा और बेंगलुरु में भी इसी तरह की कार्यप्रणाली के मामले सामने आए हैं। जांच का एक मुख्य हिस्सा यह भी है कि क्या बैंक के कुछ कर्मचारी इस सिंडिकेट का हिस्सा थे। पुलिस अब उन सभी खातों की पहचान करने में जुटी है जिनका उपयोग साइबर अपराध के लिए किया गया है।