बिहार से एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है जिसमें एक महिला को 10 फीट लंबे जहरीले कोबरा को अपने गले में लपेटे हुए देखा जा सकता है। इस घटना ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है और लोग इस खतरनाक स्टंट पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

मुख्य बिंदु

  • बिहार की एक महिला का 10 फीट लंबे कोबरा के साथ वीडियो वायरल।
  • महिला ने बिना किसी डर के जहरीले सांप को अपने गले में लपेटा।
  • वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।

बिहार से सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसे देखकर दर्शकों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं। इस वीडियो में एक महिला, जिसे अब 'स्नेक लेडी' के नाम से जाना जा रहा है, एक विशालकाय 10 फीट लंबे किंग कोबरा को अपने गले में लपेटे हुए नजर आ रही है। यह नजारा न केवल दिल दहला देने वाला है, बल्कि यह इंसान और जंगली जानवरों के बीच के खतरनाक रिश्ते को भी दर्शाता है।

वायरल वीडियो का सच

वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला बिल्कुल आराम से उस जहरीले सांप के साथ घूम रही है, जैसे कि यह कोई सामान्य गहना हो। कोबरा का आकार और उसका फन उठा हुआ होना इस बात का संकेत है कि यह कितना घातक हो सकता है। हालांकि, महिला में किसी भी तरह का डर नजर नहीं आ रहा है। यह मामला बिहार के ग्रामीण इलाकों में सांपों को लेकर लोगों की रूढ़िवादी मान्यताओं और सांप-चार्मिंग (Sapera) संस्कृति की याद दिलाता है, जहां लोग जान जोखिम में डालकर ऐसे स्टंट करते हैं।

कानूनी और सुरक्षा पहलू

वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वीडियो सिर्फ खतरनाक नहीं हैं, बल्कि यह कानूनी रूप से भी गलत हो सकते हैं। भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत जहरीले सांपों को पकड़ना, उनका शोषण करना या उन्हें इस तरह प्रदर्शित करना दंडनीय अपराध है। किंग कोबरा दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक है, और इसका एक ही डंक इंसान को मौत के घाट उतार सकता है। फिर भी, सोशल मीडिया पर लाइक्स और वायरल होने की होड़ में लोग अक्सर अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डाल देते हैं।

नेटिज़न्स की प्रतिक्रिया

वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं। कुछ लोग महिला की हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं, तो वहीं अधिकांश लोग इसे जानवरों के साथ क्रूरता और बेवजह जोखिम उठाने वाला काम बता रहे हैं। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि क्या सोशल मीडिया की दौड़ में हम वन्यजीवों की सुरक्षा और अपनी सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं?