सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने पूर्वी कमांड के प्रमुख कॉरप्सों का निरीक्षण किया और सिलिगुड़ी कॉरिडोर के रणनीतिक बेस की संचालन तत्परता का आकलन किया। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, आपदा राहत और तकनीकी नवाचारों पर जोर देते हुए सभी स्तरों से मिशन‑केन्द्रित रहने का आह्वान किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सेनाध्यक्ष धीरज सेठ ने सिलिगुड़ी कॉरिडोर के निकट बेस का निरीक्षण किया
- IV, XXXIII और III कॉरप्स की संचालन तत्परता का आकलन किया
- आंतरिक सुरक्षा, आपदा राहत और तकनीकी उन्नयन पर बल दिया
नई दिल्ली: भारतीय सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 17 जुलाई को पूर्वी कमांड के प्रमुख सैन्य इकाइयों का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सिलिगुड़ी कॉरिडोर के निकट स्थित बेंगडुबी सैन्य स्टेशन सहित कई बेसों की संचालन तत्परता का मूल्यांकन करना था, जो भारत‑बांग्लादेश सीमा के निकट स्थित ‘चिकन नेक्स’ के रूप में जाना जाता है।
सिलिगुड़ी कॉरिडोर का रणनीतिक महत्व
सिलिगुड़ी कॉरिडोर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ने वाला एकमात्र सड़क‑रेल लिंक है। इसकी चौड़ाई सबसे संकरी जगह पर 20 किमी से कम है, जिससे यह राष्ट्रीय सुरक्षा का संवेदनशील बिंदु बनता है। इस कारण, इस क्षेत्र में किसी भी असुरक्षा या बाधा का प्रभाव पूरे देश की रणनीतिक स्थिरता पर पड़ता है।
दौरे की प्रमुख स्थलें
सेनाध्यक्ष ने पहले बेंगडुबी स्टेशन का निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने कॉरिडोर के उत्तरी प्रवेश द्वार की सुरक्षा स्थिति, बुनियादी ढाँचे की मजबूती और नई तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत ब्रीफ़िंग ली। इसके बाद उन्होंने तेजपुर स्थित IV कॉरप्स (गजराज कॉरप्स) की कार्यशालाओं का दौरा किया, जहाँ सेना ने एंटी‑टेरर, जलवायु‑परिवर्तन‑संबंधी आपदा राहत और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों की प्रगति को प्रस्तुत किया।
तीसरे दिन, जनरल सेठ ने सु्कना में XXXIII कॉरप्स (त्रिशक्ति कॉरप्स) और दिमापुर में III कॉरप्स (स्पीयर कॉरप्स) के मुख्यालयों का भ्रमण किया। इन कॉरप्सों में मध्यम दूरी‑से‑वायु मिसाइल (MR‑SAM) रेजिमेंट, आर्टिलरी ब्रिगेड और सेना के एवीएशन हेलिकॉप्टर स्क्वाड्रन जैसी महत्त्वपूर्ण इकाइयाँ शामिल हैं, जो निरंतर सतर्कता के साथ काम करती हैं।
सुरक्षा, सहयोग और तकनीकी नवाचार
सेनाध्यक्ष को बताया गया कि इन कॉरप्सों ने असम और मेघालय में आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने, साथ ही बाढ़, भूस्खलन जैसी आपदाओं में त्वरित राहत प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सिविल प्रशासन, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर समन्वय के लिए प्रशंसा व्यक्त की।
जनरल सेठ ने विशेष रूप से नई तकनीकों—ड्रोन‑आधारित निगरानी, साइबर‑रिजिलिएंस प्लेटफ़ॉर्म और उन्नत कम्युनिकेशन नेटवर्क—के सफल अपनाने को सराहा। उन्होंने सभी स्तरों से कहा कि मिशन‑केन्द्रित रहना, अंतर‑एजेंसी सहयोग को सुदृढ़ करना और बहु‑डोमेन चुनौतियों के लिए तत्परता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना आवश्यक है।
त्रिशक्ति कॉरप्स ने बताया कि वह हमेशा तैयार रहता है, क्योंकि यह रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। इस कॉरप्स की सतत तत्परता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में एक प्रमुख स्तंभ के रूप में देखी जाती है।