राष्ट्र सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल ने BIMSTEC देशों के बीच सहयोग को तेज़ किया, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता, तकनीकी व्यवधान और आपूर्ति श्रृंखला चुनौती बढ़ रही है। उन्होंने कहा, सामूहिक कार्रवाई ही क्षेत्रीय शांति और समृद्धि की गारंटी है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • डोवल ने BIMSTEC में 4D नीति और MAHASAGAR दृष्टिकोण को प्रमुख बनाया।
  • समुद्री सुरक्षा, खुफिया साझेदारी और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन को प्राथमिकता दी गई।
  • भारत की सीमापार रणनीति चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ संतुलित सशक्तिकरण पर केंद्रित है।

अजित डोवल ने नई दिल्ली में पाँचवें BIMSTEC राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा की दिशा‑निर्देश तय किए। यह मंच, जिसमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं, अब बंगाल की खाड़ी में बढ़ते समुद्री जोखिम और सामूहिक आतंकवाद के जवाब में एकजुट हो रहा है।

डोवल की 4D डॉक्ट्रिन का विस्तार

डोवल की प्रसिद्ध "4D" सिद्धांत—Deterrence, Diplomacy, Development, and Defense—अब BIMSTEC के समन्वित कार्य में परिलक्षित हो रहा है। पहले तीन स्तंभों में आर्थिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा दिया गया, जबकि रक्षा स्तम्भ में भारत की नौसैनिक शक्ति को "MAHASAGAR" (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के अंतर्गत सुदृढ़ किया गया।

समुद्री सुरक्षा का नया मोड़

बंगाल की खाड़ी में वैश्विक शिपिंग रूट्स की अस्थिरता को देखते हुए, डोवल ने सभी सदस्य देशों को समुद्री निगरानी, पोर्ट सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन को एकीकृत करने का आग्रह किया। BIMSTEC ने नई समुद्री सुरक्षा दिशानिर्देश अपनाए, जो क्षेत्रीय कोऑर्डिनेशन को तेज़ करेंगे और संभावित समुद्री आतंकवादियों को रोकेंगे।

बिलेट्रल वार्ताओं का महत्व

बैठक से पूर्व, डोवल ने म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और थाईलैंड के प्रतिनिधियों के साथ निजी चर्चा की। विशेष रूप से म्यांमार में, उन्होंने सीमा पार आतंकवादी समूहों—जैसे NSCN (खापलांग), ULFA और KLO—के सक्रिय ठिकानों को समाप्त करने की चेतावनी दी। इस कदम ने भारत की उत्तर-पूर्वी सीमा में स्थिरता के लिए एक निर्णायक संदेश भेजा।

भविष्य की रणनीतिक दिशा

ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के अध्ययन के अनुसार, भारत अब "soft balancing" से "limited hard balancing" की ओर बढ़ रहा है, जहाँ कूटनीति प्राथमिक उपकरण रहती है, पर आवश्यकतानुसार सशस्त्र प्रतिक्रिया भी संभव है। यह परिवर्तन 2020 के गालवान टकराव और 2025 के पहलगाम हमले के बाद स्पष्ट हुआ, जहाँ भारत ने सैनिक तैनाती और प्री‑एम्प्टिव हवाई हमलों के माध्यम से प्रतिरोध दिखाया।

डोवल की रणनीति न केवल चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों को संतुलित करती है, बल्कि भारत को दक्षिण‑एशिया में एक भरोसेमंद सुरक्षा साथी के रूप में स्थापित करती है। BIMSTEC के माध्यम से सामूहिक सुरक्षा, आर्थिक लचीलापन और समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करके, भारत की क्षेत्रीय प्रभावशीलता अगले दशक में और अधिक विस्तृत होने की संभावना है।