अमेरिका और ईरान के बीच छह दिनों से जारी हवाई हमलों ने मध्य पूर्व में तबाही मचा दी है। ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमले और जवाबी मिसाइल हमलों के साथ युद्ध अब सीरिया और इराक तक फैल गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अमेरिका ने ईरान के होर्मोजगन प्रांत में 6 महत्वपूर्ण पुलों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।
  • ईरान ने सीरिया, इराक और कतर जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नाकाबंदी के कारण वैश्विक तेल कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।
  • राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य प्रयास 'बड़ी जीत' की ओर बढ़ रहे हैं।

मध्य पूर्व का संकट अब एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह दिनों से चल रहे हवाई हमलों ने वैश्विक भू-राजनीति को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक राष्ट्र के नाम संबोधन में आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि अमेरिका इस संघर्ष में 'बड़ी जीत' हासिल कर रहा है और जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

युद्ध का विस्तार: सीरिया और इराक में तनाव

युद्ध का दायरा अब केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा है। ईरान की क्रांतिकारी गार्ड्स (IRGC) ने अपने हमलों का विस्तार करते हुए उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र और सीरिया में अमेरिकी विशेष अभियान कमांड केंद्र को निशाना बनाया है। इसके साथ ही, ईरान ने कतर जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर भी मिसाइल हमले किए हैं। ईरान का स्पष्ट रुख है कि जब तक अमेरिकी हमले जारी रहेंगे, तब तक तेल और गैस का निर्यात नहीं किया जाएगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है।

बुनियादी ढांचे पर हमला और आर्थिक प्रभाव

अमेरिकी केंद्रीय कमांड (CENTCOM) ने ईरान के दक्षिणी होर्मोजगन प्रांत में रणनीतिक पुलों को नष्ट करने की पुष्टि की है। इनमें बंदर अब्बास को जोड़ने वाला गैरिवाह पुल भी शामिल है। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की रसद क्षमता को कम करना और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर उसके नियंत्रण को चुनौती देना है। इस सैन्य अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है; ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि देखी गई है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

कूटनीतिक विफलता और भविष्य का संकट

पिछले महीने हुआ अंतरिम युद्धविराम अब पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। अमेरिका द्वारा लगाए गए समुद्री नाकाबंदी और ईरान के जवाबी ड्रोन हमलों ने कूटनीतिक रास्ते बंद कर दिए हैं। ओमान और कुवैत जैसे क्षेत्रों में भी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है, जो संकेत देता है कि यह संघर्ष आने वाले दिनों में और अधिक हिंसक रूप ले सकता है।