राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के नेतृत्व में यूक्रेन सरकार में बड़ा बदलाव हुआ है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गज सेर्ही कोरेत्स्की को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • यूक्रेन की संसद ने सेर्ही कोरेत्स्की को भारी बहुमत से नया प्रधानमंत्री चुना।
  • कोरेत्स्की पूर्व में सरकारी ऊर्जा कंपनी Naftogaz के प्रमुख रहे हैं।
  • रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव को बर्खास्त करने के फैसले के खिलाफ संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन जारी है।
  • ज़ेलेंस्की का लक्ष्य युद्ध के दौरान ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

कीव: यूक्रेन के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। गुरुवार को यूक्रेन की संसद ने सेर्ही कोरेत्स्की (Serhii Koretskyi) को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कोरेत्स्की, जो पहले यूक्रेन की प्रमुख राज्य ऊर्जा कंपनी Naftogaz के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, अब देश की आर्थिक और ऊर्जा नीतियों का नेतृत्व करेंगे।

युद्धकालीन चुनौतियों के बीच रणनीतिक बदलाव

राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने कोरेत्स्की के नामांकन के पीछे एक स्पष्ट रणनीतिक उद्देश्य बताया है। ज़ेलेंस्की के अनुसार, कोरेत्स्की का ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक अनुभव यूक्रेन को आगामी युद्धकालीन सर्दियों के लिए तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। युद्ध के कारण ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर बढ़ते हमलों को देखते हुए, सरकार का मुख्य फोकस ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति बनाए रखना है। संसद में इस नियुक्ति के पक्ष में 289 वोट पड़े, जो सरकार के इस निर्णय को व्यापक समर्थन दर्शाता है।

बढ़ता राजनीतिक तनाव और विरोध प्रदर्शन

हालांकि प्रधानमंत्री की नियुक्ति को लेकर संसद में सहमति दिखी, लेकिन देश के भीतर राजनीतिक तनाव चरम पर है। संसद के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के उस फैसले का कड़ा विरोध किया, जिसके तहत रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव (Mykhailo Fedorov) को केवल छह महीने के कार्यकाल के बाद पद से हटा दिया गया है।

सैन्य सुधारों पर संकट के बादल

आलोचकों और विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि रक्षा मंत्री की अचानक बर्खास्तगी से यूक्रेन के सैन्य सुधारों की गति धीमी हो सकती है। युद्ध के नाजुक दौर में नेतृत्व में इस तरह का बदलाव न केवल प्रशासनिक अस्थिरता पैदा कर सकता है, बल्कि सैन्य रणनीतियों के कार्यान्वयन में भी बाधा डाल सकता है। वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि यूक्रेन एक तरफ बाहरी आक्रमण से लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ आंतरिक राजनीतिक पुनर्गठन के दौर से भी गुजर रहा है।