पीयू रिसर्च सेंटर के नवीनतम सर्वे में 36 देशों में चीन को अमेरिकी की तुलना में अधिक सकारात्मक रूप में देखा गया। यह दो दशकों में पहली बार है जब चीन ने वैश्विक स्तर पर अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पीयू सर्वे में 36 देशों में चीन को अधिक सकारात्मक राय मिली
- पहली बार दो दशकों में चीन ने अमेरिका को वैश्विक स्तर पर पीछे छोड़ा
- परिणाम भू-राजनीतिक तनाव और राष्ट्रीय नीतियों से प्रभावित
पीयू रिसर्च सेंटर ने फरवरी से मई 2026 के बीच 36 देशों में 42,000 से अधिक लोगों को सर्वे किया, जिससे पता चला कि अब चीन को संयुक्त राज्य की तुलना में अधिक अनुकूल नजरिया मिल रहा है। इस बदलाव ने अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक राय के मानचित्र को पुनः लिख दिया है, जहाँ पहले दो दशकों से अमेरिका को अधिक पसंद किया जाता रहा था।
पृष्ठभूमि और सर्वेक्षण पद्धति
पीयू के इस सर्वेक्षण का उद्देश्य विभिन्न देशों में राष्ट्रीय नेताओं, आर्थिक नीतियों और विदेशियों के प्रति जनसंतोष को मापना था। सर्वेक्षण में मध्य 51% उत्तरदाताओं ने चीन को अनुकूल माना, जबकि 39% ने इसे नकारात्मक रूप से देखा। 25 देशों में चीन ने अमेरिकी की तुलना में बेहतर स्कोर हासिल किया, जबकि केवल छह देशों में अमेरिका ने बेहतर प्रदर्शन किया।
भू-राजनीतिक कारण
विशेषकर यूएस‑इज़राइल‑ईरान संघर्ष, ट्रम्प प्रशासन की "अमेरिका फर्स्ट" नीति, और कोविड‑19 के बाद वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने अमेरिकी छवि को धूमिल किया। दूसरी ओर, शी जिनपिंग के तहत चीन ने बुनियादी बुनियादी ढांचा, विकासशील देशों में निवेश, और वैक्सीन्स के वितरण में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे कई देशों में सकारात्मक धारणाएँ उत्पन्न हुईं।
प्रमुख समर्थक देश
इंडोनेशिया, इटली, ग्रीस, स्पेन और कनाडा सहित कई राष्ट्रों ने चीन के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की। इन देशों ने अक्सर चीन के आर्थिक सहयोग और कम हस्तक्षेपी नीतियों को सराहा। इसके विपरीत, फिलीपींस, पोलैंड, दक्षिण कोरिया, भारत, जापान और इज़राइल ने अभी भी अमेरिकी को अधिक अनुकूल माना।
प्रभाव और भविष्य की दिशा
यह परिवर्तन न केवल सार्वजनिक राय को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भी बदलाव का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन इस सकारात्मक प्रवृत्ति को जारी रखता है, तो वह बहुपक्षीय मंचों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है। वहीं, अमेरिकी नीति निर्माताओं को अपनी विदेश नीति में पुनः विचार करने की आवश्यकता होगी, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में विश्वास पुनः स्थापित किया जा सके।
पीयू के सहयोगी लारा सिल्वर ने कहा, "युद्ध की स्थिति और अमेरिकी नेतृत्व में कम विश्वास ने इस परिणाम को तेज़ किया है।" यह संकेत देता है कि सार्वजनिक राय अक्सर तत्काल घटनाओं और राष्ट्रीय नीतियों के साथ गहराई से जुड़ी होती है।