केरल के उपभोक्ता आयोग ने ओमान एयर को सेवा में कमी के लिए दोषी पाया है। एक महिला को फ्लाइट मिस होने के कारण असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी गंवानी पड़ी, जिसके बाद उसे 53,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ओमान एयर को सेवा में कमी के लिए केरल उपभोक्ता आयोग ने दोषी ठहराया।
- फ्लाइट में देरी के कारण एक महिला को केरल में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी गंवानी पड़ी।
- आयोग ने एयरलाइन को 50,000 रुपये मुआवजे और 3,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया।
- एयरलाइन का तर्क था कि उन्होंने आवास और भोजन की व्यवस्था की थी, जिसे आयोग ने पर्याप्त नहीं माना।
केरल के तिरुवनंतपुरम जिला उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ओमान एयर को सेवा में कमी (deficiency of service) का दोषी पाया है। यह मामला एक महिला, हेना एम. से जुड़ा है, जिन्होंने फ्लाइट की देरी के कारण न केवल अपनी दुबई की नौकरी खोई, बल्कि केरल में मिलने वाला एक प्रतिष्ठित असिस्टेंट प्रोफेसर का अवसर भी हाथ से गंवा दिया।
क्या था पूरा मामला?
घटनाक्रम के अनुसार, हेना एम. दुबई में एक आर्काइव्स क्लर्क के रूप में कार्यरत थीं। उन्हें केरल के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में एक साल के अनुबंध (contract) पर असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। इस नई जिम्मेदारी को निभाने के लिए उन्होंने अपनी दुबई की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और 2 जून, 2016 को दुबई से तिरुवनंतपुरम के लिए बिजनेस क्लास टिकट बुक की।
हेना का लक्ष्य 3 जून की सुबह तक केरल पहुंचना था ताकि वे अपनी ज्वाइनिंग समय पर पूरी कर सकें। हालांकि, मस्कट (Muscat) पहुंचने के बाद, पहली फ्लाइट में देरी होने के कारण वे अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट मिस कर गईं। इस देरी के चलते वे 4 जून को तिरुवनंतपुरम पहुंच सकीं, जिससे वे अपनी नई नौकरी ज्वाइन करने की समय सीमा चूक गईं।
आयोग का सख्त रुख और एयरलाइन का बचाव
ओमान एयर के वकीलों ने दलील दी कि दुबई से पहली फ्लाइट तकनीकी कारणों से देरी से चली थी और एयरलाइन ने मस्कट में महिला को होटल, भोजन और परिवहन की सुविधा प्रदान की थी। एयरलाइन का यह भी तर्क था कि यात्री को समय से पहले यात्रा बुक करनी चाहिए थी।
हालांकि, आयोग के अध्यक्ष पी. वी. जयराजन और सदस्यों ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल आवास और भोजन प्रदान करना एयरलाइन को उसकी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता है। आयोग ने कहा कि नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार, यात्रियों को देरी के कारणों के बारे में सूचित करना और वैकल्पिक व्यवस्था करने में मदद करना एयरलाइन का कर्तव्य है।
मानसिक और आर्थिक क्षति का आकलन
आयोग ने माना कि एक प्रतिष्ठित संस्थान में प्रोफेसर बनने का अवसर खोना किसी भी व्यक्ति के लिए अत्यधिक मानसिक तनाव और वित्तीय नुकसान का कारण है। परिणामस्वरूप, आयोग ने ओमान एयर को निर्देश दिया कि वह हेना को 50,000 रुपये मुआवजे के रूप में और 3,000 रुपये कानूनी लागत के रूप में भुगतान करे।