अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अमेरिका ने ईरान के चाबहार, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए।
- ईरान ने 'ऑपरेशन लाइटनिंग' के तहत कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
- जॉर्डन ने ईरान की आठ मिसाइलों को मार गिराया, जबकि ईरान ने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन गिराने का दावा किया।
- होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री व्यापार बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।
मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध की स्थिति भयावह होती जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा यह संघर्ष अब सीधे तौर पर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के कई महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों पर किए गए बड़े हवाई हमलों के बाद, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर युद्ध की आग को और भड़का दिया है।
ईरानी शहरों पर अमेरिकी प्रहार
अमेरिकी हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की वह सैन्य क्षमता को नष्ट करना है जो होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में समुद्री यातायात को बाधित कर सकती है। अमेरिकी सेना ने चाबहार, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप सहित कई शहरों में भीषण विस्फोट किए। रिपोर्टों के अनुसार, हमले का दायरा उत्तरी ईरान तक भी फैल गया है, जिसमें सेमनान एयरपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचा है। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में अब तक कम से कम 35 लोगों की जान जा चुकी है और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
ईरान का 'ऑपरेशन लाइटनिंग' और जवाबी कार्रवाई
ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई के लिए 'ऑपरेशन लाइटनिंग' की घोषणा की है। ईरान का दावा है कि उसने कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस और बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जिससे वहां के रडार और ईंधन भंडार को नुकसान पहुँचा है। वहीं, जॉर्डन की वायुसेना ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए ईरान की आठ मिसाइलों को सीमा में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल संकट
इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। लॉयड लिस्ट के आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से होने वाला समुद्री व्यापार लगभग ठप हो गया है। जहाजों के सुरक्षित आवागमन के अभाव में कई कंपनियां 'डार्क ट्रांजिट' का सहारा ले रही हैं। इस अस्थिरता के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 85.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़े संकट का संकेत है।