जुलाई 1926 में द हिन्दू के अभिलेखों में प्रकाशित एक सरकारी योजना ने भारतीय रेलवे के तीन प्रमुख विभागों में 75% पदों को भारतीयों को देने का लक्ष्य रखा। यह पहल ली सिफ़ारिशों के बाद भारतीय अधिकारियों की भर्ती और प्रशिक्षण को तेज़ करने के लिए तैयार की गई थी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ली सिफ़ारिशों के अनुसार नई भर्ती योजना तैयार
- तीन प्रमुख विभागों में 75% पदों को भारतीयों को देने का लक्ष्य
- योजना का उद्देश्य भारतीय रेलवे की स्वायत्तता एवं दक्षता बढ़ाना
द हिन्दू के अभिलेखों में 16 जुलाई, 1926 को प्रकाशित एक आधिकारिक विज्ञप्ति ने भारत सरकार द्वारा तैयार की गई रेलवे भर्ती एवं प्रशिक्षण योजना को सार्वजनिक किया। यह योजना ली सिफ़ारिशों (Lee Recommendations) के बाद, ब्रिटिश भारत में भारतीय अधिकारियों की भागीदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।
पृष्ठभूमि
19वीं सदी के अंत में भारतीय उपमहाद्वीप में रेलवे का विस्तार तेज़ी से हुआ, लेकिन उच्च स्तर के अधिकारी अधिकांशतः ब्रिटिश सेना और सिविल सेवाओं से नियुक्त होते थे। 1920 के दशक में "ली कमेटी" ने भारतीय अधिकारियों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिससे रेलवे प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इस सिफ़ारिश को स्वीकार करने के बाद, सरकार ने तीन मुख्य विभागों—परिवहन (ट्रैफ़िक) एवं वाणिज्य, सिविल इंजीनियरिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं पावर—के लिए विशेष भर्ती योजना तैयार की।
योजना के मुख्य बिंदु
योजना का प्रमुख लक्ष्य था कि कुल रिक्तियों में से 75% पद भारतीय अभ्यर्थियों को प्रदान किए जाएँ, बशर्ते वे योग्य हों। इसके लिए एक विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया, जिसमें सैद्धांतिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण दोनों शामिल थे। प्रत्येक विभाग के लिए अलग-अलग चयन मानदंड तय किए गए, जिससे तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक क्षमता दोनों को संतुलित किया जा सके।
ऐतिहासिक महत्व
यह पहल भारतीय रेलवे की स्वायत्तता के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई। पहले के वर्षों में भारतीय अधिकारियों की संख्या बहुत कम थी, जिससे निर्णय‑लेने की प्रक्रिया में अक्सर विदेशी दृष्टिकोण का प्रभाव रहता था। 75% लक्ष्य की घोषणा ने न केवल भारतीय प्रतिभा को प्रोत्साहित किया, बल्कि राष्ट्रीय गर्व की भावना को भी मजबूत किया। बाद में स्वतंत्रता के बाद इस नीति ने भारतीय रेलवे को एक स्वायत्त, कुशल और विश्वसनीय संस्थान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भविष्य की दिशा
एक सदी बाद, इस योजना के मूल सिद्धांत—स्थानीय प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और तकनीकी प्रशिक्षण को सुदृढ़ करना—आज भी भारतीय रेलवे के मानव संसाधन नीति में प्रतिबिंबित होते हैं। आधुनिक रेलवे प्रोजेक्ट्स, जैसे हाई‑स्पीड ट्रेनों और डिजिटल नियंत्रण प्रणाली, इन प्रारम्भिक पहलों की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।