टमाटर, जो अब हमारे घरों की रसोई में अनिवार्य है, मूल रूप से दक्षिण अमेरिकी मूल का फल है। 17वीं सदी में पुर्तगालियों ने इसे भारत लाया, और ब्रिटिश काल में यह भारतीय पकवानों में मुख्य घटक बन गया। इस लेख में टमाटर की आयात, स्थानीय खेती और भारतीय व्यंजनों में उसके परिवर्तन की कहानी को विस्तार से बताया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • टमाटर का मूल दक्षिण अमेरिका में है, 1600 के दशक में पुर्तगालियों ने इसे भारत लाया।
  • ब्रिटिश शासन के दौरान टमाटर भारतीय रसोई में लोकप्रिय हुआ, विशेषकर बंगाली मीठा‑खट्टा व्यंजनों में।
  • आज भारत में लगभग 1,000 किस्में उगाई जाती हैं, और यह विश्व में चीन के बाद तीसरा प्रमुख उत्पादक है।

टमाटर को अक्सर “विलायती” कहा जाता है, क्योंकि यह भारतीय मूल का नहीं है। दक्षिण अमेरिकी मूल के इस फल को पहली बार 1600 के दशक में पुर्तगाली अन्वेषकों ने भारत की धरती पर पहुँचाया। लेकिन यह ब्रिटिशों के आगमन तक आम जनता की थाली में नहीं आया।

ब्रिटिशों की प्रारम्भिक अनिच्छा और धीरे‑धीरे स्वीकृति

शुरुआती ब्रिटिश शासकों ने टमाटर को रात के खाने की पौधों (नाइटशेड) के कारण विषाक्त मान लिया, जिससे इसे खाने में हिचकिचाहट रही। 18वीं सदी के मध्य में यूरोप में टमाटर को सूप, सलाद और स्ट्यू में प्रयोग करने की प्रवृत्ति बढ़ी, और साथ ही भारत में भी इसका प्रयोग शुरू हुआ। ब्रिटिश कुकबुक, जैसे Wyvern’s Indian Cookery Book (1840), ने टमाटर को “इंग्लिश वेजिटेबल ग्रोन इन इंडिया” के तहत वर्गीकृत किया।

स्थानीय खेती और पहली रिपोर्टें

1832 में स्कॉटिश वनस्पतिशास्त्री विलियम रॉक्सबर्ग ने भारत में टमाटर की व्यावसायिक खेती की पहली रिपोर्ट दर्ज की। 19वीं सदी के एंग्लो‑इंडियन कुकबुक में टमाटर को बेक, ग्रैटिन और ग्रेवी में उपयोग किया गया, लेकिन ये रेसिपी मुख्यतः यूरोपीय स्वाद पर आधारित थीं। 1801 की पर्सियन अनुवादित कुकबुक Nuskha‑i Ni’mat Khān ने टमाटर को शोरबा और करी में शामिल करने की पहली भारतीय‑विशिष्ट विधि प्रस्तुत की।

20वीं सदी में टमाटर का भारतीयकरण

जैसे-जैसे भारतीय स्वाद ने टमाटर को अपनाया, यह बंगाली मीठा‑खट्टा शैली में विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ। 1914 की सावित्री चौधरी की डायस्पोरिक कुकबुक और 1926 की Pak Chandrika ने टमाटर चटनी तथा ग्रेवी के कई प्रयोग दिखाए। आज भारत में लगभग 1,000 विभिन्न किस्में उगाई जाती हैं, और उत्पादन के मामले में चीन के बाद तीसरा स्थान रखता है।

भविष्य की ओर एक नज़र

टमाटर की विविधता और स्वाद ने इसे भारतीय व्यंजनों का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। विदेशी बाजारों में भी टमाटर‑सलाद और विभिन्न किस्में दर्शकों को आकर्षित करती हैं। अगली लेख में मसाला पाउडर – गुनपाउडर या पोड़ी – के इतिहास पर चर्चा होगी, जो दोसे, इडली और घी के साथ परोसी जाती है।