मदुरै के गांधी मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय को तीन वर्षों से बंद रखने के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने ऐतिहासिक संसाधनों तक पहुंच बाधित होने पर चिंता जताई है।

मदुरै, तमिलनाडु: मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह याचिका गांधी मेमोरियल संग्रहालय और इसके पुस्तकालय के नवीनीकरण कार्य को तेजी से पूरा करने और इसे जनता के लिए फिर से खोलने की मांग करती है।

ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान संकट

वर्ष 1959 में स्थापित, गांधी मेमोरियल संग्रहालय भारत के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक है। यह महात्मा गांधी के जीवन, उनके सिद्धांतों और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को समर्पित है। याचिकाकर्ता ए.वी. कथिर के अनुसार, संग्रहालय में गांधीजी से जुड़े दुर्लभ और अमूल्य संग्रह मौजूद हैं, जिनमें मूल पांडुलिपियां, पत्र, ऐतिहासिक दस्तावेज, दुर्लभ तस्वीरें और कलाकृतियां शामिल हैं।

संग्रहालय के साथ संलग्न पुस्तकालय भी शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और सिविल सेवा परीक्षार्थियों के लिए एक अनिवार्य संसाधन रहा है। यहाँ स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधार और गांधीवादी दर्शन से संबंधित दुर्लभ साहित्य और शोध पत्र उपलब्ध हैं।

तीन साल का लंबा इंतजार और शैक्षणिक नुकसान

याचिका में तर्क दिया गया है कि लगभग तीन साल पहले, अधिकारियों ने संग्रहालय और पुस्तकालय को नवीनीकरण, आधुनिकरण और रखरखाव के उद्देश्य से बंद कर दिया था। हालांकि, जनता को उम्मीद थी कि यह कार्य एक उचित समय सीमा के भीतर पूरा हो जाएगा, लेकिन लंबे समय तक बंद रहने के कारण छात्रों, विद्वानों और शोधकर्ताओं को महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और शैक्षिक संसाधनों से वंचित होना पड़ रहा है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस निरंतर बंदी से न केवल शैक्षणिक अध्ययन प्रभावित हुआ है, बल्कि सार्वजनिक जागरूकता और विरासत शिक्षा को भी गहरा धक्का लगा है। न्यायमूर्ति ए.डी. जगदीश चंद्रा और न्यायमूर्ति आर. पूर्णिमा की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख तय की है।