क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर ने 16-18 जुलाई को भारतीय सिर‑और‑गला रेडियोलॉजी सोसाइटी (ISHNR) का सातवाँ वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया। 300 से अधिक विशेषज्ञ संरचित रिपोर्टिंग और बहु‑विषयक उपचार पर चर्चा करेंगे।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ISHNR 2026 का सम्मेलन CMC वेल्लोर में आयोजित
  • थीम: चेकलिस्ट से निष्कर्ष – संरचित रिपोर्टिंग पर जोर
  • 300+ रेडियोलॉजिस्ट, सर्जन और ENT विशेषज्ञ भाग लेंगे

क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC), वेल्लोर ने 16‑18 जुलाई को भारतीय सिर‑और‑गला रेडियोलॉजी सोसाइटी (ISHNR) का सातवाँ वार्षिक सम्मेलन (ISHNR 2026) अपने परिसर में आयोजित किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय और अंतर‑राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और रेडियोलॉजी के नवीनतम प्रोटोकॉल एवं बहु‑विषयक सहयोग को बढ़ावा देता है।

पृष्ठभूमि और महत्व

CMC, जो 1900 के दशक की शुरुआत में स्थापित हुआ, भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में से एक है और कई बार शोध एवं शिक्षा में अग्रणी रहा है। ISHNR, 2010 में स्थापित, सिर‑और‑गला क्षेत्र में इमेजिंग की गुणवत्ता सुधारने के लिए कार्य करता है। इस साल का सम्मेलन "चेकलिस्ट से निष्कर्ष" (Checklists to Conclusions) थीम पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य संरचित रिपोर्टिंग को मानकीकृत करके क्लिनिकल निर्णय‑लेने की प्रक्रिया को तेज़ और सटीक बनाना है।

सम्मेलन का एजेंडा

300 से अधिक प्रतिनिधियों—जिसमें रेडियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजी प्रशिक्षु, सिर‑और‑गला सर्जन और ओटोराइनोलॉजिस्ट (ENT) शामिल हैं—की भागीदारी निर्धारित है। प्रमुख सत्रों में नवीनतम MRI, CT और PET‑CT तकनीकों की प्रस्तुति, केस‑स्टडी आधारित कार्यशालाएँ, तथा बहु‑विषयक टीमों के बीच संवाद को सुगम बनाने वाले पैनल चर्चा शामिल हैं। सम्मेलन का उद्घाटन CMC के प्रिंसिपल सॉलोमन सातिशकुमार करेंगे, जिससे शैक्षणिक सहयोग और नेटवर्किंग को प्रोत्साहन मिलेगा।

रोगी देखभाल पर संभावित प्रभाव

संरचित रिपोर्टिंग के माध्यम से रेडियोलॉजिस्ट अपने निष्कर्षों को स्पष्ट, पुनरुत्पादक और क्लिनिकल संदर्भ में प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे सर्जन और अन्य चिकित्सकों को जल्दी और सटीक उपचार योजना बनाना आसान हो जाता है। इस पहल से भारत में सिर‑और‑गला कैंसर, थायरॉयड रोग और अन्य जटिलताओं की प्रारंभिक पहचान और प्रबंधन में सुधार की उम्मीद है।

भविष्य की दिशा

ISHNR 2026 न केवल ज्ञान के आदान‑प्रदान का मंच है, बल्कि भारत के स्वास्थ्य प्रणाली में इमेजिंग के एकीकरण को सुदृढ़ करने वाला एक कदम भी है। इस तरह के सम्मेलन नियमित रूप से आयोजित होने से राष्ट्रीय स्तर पर मानक स्थापित होंगे और युवा चिकित्सकों को उन्नत तकनीकी कौशल प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।