राष्ट्रीय मेडिकल कमिशन ने 9,911 अतिरिक्त MBBS सीटें मंजूर की, जिससे कुल क्षमता 1,36,939 तक पहुंची। यह वृद्धि 2023 के ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन में बदलावों के कारण संभव हुई, जो कॉलेजों को दूसरे वर्ष से ही सीट बढ़ाने की अनुमति देता है। निजी संस्थानों ने इस विस्तार में प्रमुख भूमिका निभाई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कुल MBBS क्षमता 1,36,939 तक पहुंची
  • 9,911 नई सीटें, जिनमें 2,400 नई मेडिकल कॉलेजों में
  • निजी संस्थानों ने 79% अतिरिक्त सीटें प्रदान कीं

राष्ट्रीय मेडिकल कमिशन (NMC) ने 9,911 अतिरिक्त अंडरग्रेजुएट सीटों को मंजूरी दी, जिससे 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए भारत की कुल MBBS क्षमता एक ऐतिहासिक 1,36,939 सीटों पर पहुँच गई। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है, जहाँ 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी हर साल NEET‑UG परीक्षा देते हैं, जबकि सीटों की कमी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है।

नियमों में बदलाव और उनका प्रभाव

मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) के अध्यक्ष एम के रमेश ने बताया कि यह तीव्र वृद्धि 2023 के ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन (GMER) के तहत लाए गए बदलावों के कारण संभव हुई। पहले, किसी मेडिकल कॉलेज को अपनी पहली बैच के पाँच साल पूरा होने के बाद ही सीटें बढ़ाने की अनुमति मिलती थी। नई नियमावली ने इस प्रतिबंध को हटाकर, दूसरे वर्ष से ही बढ़ोतरी की अनुमति दी, बशर्ता संस्थान नियत मानकों का पालन करे।

नए और मौजूदा कॉलेजों में विस्तार

स्वीकृत सीट मैट्रिक्स में 823 मेडिकल कॉलेज शामिल हैं, जिनमें 441 सरकारी और 382 निजी संस्थान हैं। इनमें 25 नई स्थापित मेडिकल कॉलेजों (7 सरकारी, 18 निजी) में 2,400 अतिरिक्त सीटें प्रदान की गईं, जबकि शेष 7,511 सीटें मौजूदा कॉलेजों में इन्टेक बढ़ाकर जोड़ी गईं। निजी संस्थानों ने कुल अतिरिक्त सीटों का लगभग 79% हिस्सा संभाला, जिससे उनकी भूमिका इस विस्तार में स्पष्ट हो गई।

भविष्य की संभावनाएँ और नियामक चेतावनी

सेटों की इस बढ़ोतरी से भारत के डॉक्टर‑जनसंख्या अनुपात में सुधार की उम्मीद है; वर्तमान में यह 1:811 के अनुपात पर है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक लगभग 1:1000 माना जाता है। हालांकि, NMC ने यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि कोई भी कॉलेज अपने स्वीकृत इन्टेक से अधिक छात्रों को दाखिला नहीं देगा, अन्यथा NMC अधिनियम 2019 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कॉलेजों को सलाह दी गई है कि वे काउंसलिंग शुरू होने से पहले अपनी सीट मैट्रिक्स की पुष्टि करें और किसी भी विसंगति की रिपोर्ट MARB को दें।

समग्र प्रभाव

यह रिकॉर्ड‑उच्च क्षमता न केवल मेडिकल शिक्षा के विस्तार को दर्शाती है, बल्कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अधिक डॉक्टरों की उपलब्धता ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में सुधार कर सकती है, जिससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों की पूर्ति तेज़ होगी। साथ ही, निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) मॉडल भविष्य में मेडिकल शिक्षा के विस्तार में प्रमुख भूमिका निभा सकता है।