तमिलनाडु सरकार ने 86 प्रमुख बांधों, जिनमें मेत्तुर और वैगई शामिल हैं, की सुरक्षा मूल्यांकन के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनलों का गठन किया है। प्रत्येक बांध का विस्तृत मूल्यांकन 30 दिसंबर 2026 से पहले पूरा किया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 86 बांधों पर स्वतंत्र पैनलों द्वारा व्यापक सुरक्षा जांच होगी।
- पहला पूरा मूल्यांकन 30 दिसंबर 2026 से पहले होना अनिवार्य है।
- पैनलों में जल विज्ञान, भूविज्ञान, भूकंप विज्ञान और मानक संस्थानों के वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल हैं।
तमिलनाडु के जल संसाधन विभाग ने इस सप्ताह एक आदेश जारी किया, जिसमें राज्य के 86 बांधों और जलाशयों—जिनमें मेत्तुर, भावनिसागर, अमरावती और वैगई जैसे प्रमुख संरचनाएं शामिल हैं—को स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनलों के अधीन किया गया है। यह कदम राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित समय सीमा को पूरा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पैनलों की संरचना और कार्यप्रणाली
इन पैनलों में केंद्रीय जल आयोग (CWC) के पूर्व अध्यक्ष जॉर्ज चंद्रशेखर अय्यर और ए.के. बजाज, कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के पूर्व प्रमुख योगिंदर कुमार शर्मा, शैलेश कुमार श्रीवास्तव, तथा तमिलनाडु जल संसाधन विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता आर. सेल्वम जैसे अनुभवी पेशेवर शामिल हैं। प्रत्येक पैनल का सदस्य-सेक्रेटरी संबंधित सुपरिंटेंडिंग अभियंता होगा, जो मूल्यांकन प्रक्रिया को सुगम बनाएगा।
कानूनी पृष्ठभूमि और समयसीमा
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के अनुसार, सभी निर्दिष्ट बांधों का प्रथम व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन 30 दिसंबर 2026 तक पूरा होना अनिवार्य है। यह अधिनियम राज्य‑स्तरीय और अंतर-राज्यीय दोनों प्रकार के बांधों को कवर करता है, जिससे जल सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन में सुधार की उम्मीद है।
बांधों की आयु वर्गीकरण और जोखिम
तमिलनाडु में कुल 123 बांधों की सूची में से, पाँच बांधों की आयु 100 वर्ष से अधिक है, 59 बांधों की आयु 50‑99 वर्ष, 40 बांधों की आयु 25‑49 वर्ष, जबकि शेष 19 नई संरचनाएं हैं। उम्रदराज़ बांधों की संरचनात्मक क्षमताओं को पुनः जांचना आवश्यक है, खासकर भूकंपीय जोखिम और जल प्रवाह के बदलते पैटर्न को देखते हुए।
भविष्य की दिशा
पैनलों द्वारा किए जाने वाले अध्ययन में सुरक्षा, डिजाइन, भूविज्ञान, जलविज्ञान, हाइड्रो‑मैकेनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन जैसे कई पहलुओं की गहन जाँच शामिल होगी। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप सुधारात्मक उपाय, पुनर्निर्माण या नियोजित रखरखाव कार्यों की सिफारिशें की जाएँगी, जिससे तमिलनाडु की जल सुरक्षा नीति में नई दिशा मिलेगी।