केरल में लगातार कम वर्षा और उच्च तापमान ने कई जिलों में लगभग 80% बोनी गई फसल को नष्ट कर दिया है। उपमंत्री जी. परमहेश्वर ने केंद्र सरकार से इस सूखे को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और त्वरित सहायता प्रदान करने की अपील की है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कर्नाटक में 80% फसल क्षति का अनुमान
  • डिप्टी सीएम जी. परमहेश्वर ने केंद्र को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का अनुरोध किया
  • पुराने 2015-16 कृषि जनगणना के बजाय FRUITS डेटा पर भरोसा करने की मांग

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमहेश्वर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखित अनुरोध किया है, जिसमें वर्तमान सूखे को "राष्ट्रीय स्तर की आपदा" घोषित करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि इस घोषणा से राज्य को तुरंत राहत उपाय लागू करने और किसानों तथा ग्रामीण परिवारों को आवश्यक समर्थन देने की क्षमता मिलेगी।

वर्तमान मौसमी स्थिति और क्षति का पैमाना

जून में राज्य ने 42% वर्षा घाटा दर्ज किया, जबकि कल्याण कर्नाटक में यह घटकर 36% रहा। जुलाई में यह घाटा और बढ़ कर औसतन 34% तक पहुंच गया, जिसमें राजधानी बेंगलुरु भी 34% की कमी का सामना कर रहा है। प्रारंभिक आकलनों के अनुसार, कई प्रभावित क्षेत्रों में बोनी गई फसल का लगभग 80% नुकसान हो चुका है, मुख्य कारण अपर्याप्त वर्षा और लगातार उच्च तापमान बताया गया है।

भौगोलिक विस्तृत प्रभाव

विजयनगर (61%), मैसूर (55%), कोडगु (51%), चीकामगलूर (48%) और कई अन्य जिलों में वर्षा घाटा 40% से 61% के बीच है। यह सूखा विभिन्न कृषि‑जलवायु क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है, जिससे जल उपलब्धता संकट और भूजल क्षीणन तेज हो रहा है।

डेटा असंगति और नीति सुधार की आवश्यकता

परमहेश्वर ने कहा कि 2015‑16 कृषि जनगणना पर अभी भी भरोसा किया जा रहा है, जबकि राज्य का FRUITS (Farmer Registration and Unified Beneficiary Information System) डेटाबेस दर्शाता है कि अब लगभग 83% कृषि भूमि छोटे और सीमांत किसानों के पास है। यह अंतर लाभार्थियों की सही पहचान में बाधा बन रहा है, जिससे समय पर सहायता नहीं मिल पा रही। उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि) के तहत सहायता के लिए FRUITS डेटा को आधिकारिक मान्य किया जाए।

भविष्य की दिशा और राष्ट्रीय स्तर की प्रतिक्रिया

यदि मौसमी स्थितियां नहीं सुधरतीं तो कर्नाटक आगामी मौसम में एक विस्तृत सूखा स्मारक (Drought Memorandum) प्रस्तुत करेगा। इस संदर्भ में, राष्ट्रीय स्तर पर त्वरित निर्णय न केवल कृषि को बचाएगा, बल्कि ग्रामीण जल आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा को भी स्थिर करेगा।