उत्त प्रदेश सरकार ने कुकराइल रिज़र्व वन में नाइट सफारी को देश‑पहला प्रोजेक्ट बताया, जबकि याचिकाकर्ता ने इसे संरक्षित वन में वाणिज्यिक पर्यटन कहा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी आवश्यक मंजूरी के साथ प्रोजेक्ट को मान्य किया पर पर्यावरणीय निगरानी पर कड़ी चेतावनी दी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सुप्रीम कोर्ट ने सभी केंद्रिय मंजूरियों के बाद कुकराइल नाइट सफारी को अनुमोदित किया।
  • परियोजना 850 एकड़ में फैली है, जिसमें 71% हरित आवरण रहेगा और 100‑साल पुराना जू‑पार्क स्थानांतरित होगा।
  • केंद्रीय सशक्त समिति को तीन महीने में साइट विजिट कर अनुपालन की रिपोर्ट देनी होगी, साथ ही वन संरक्षण अधिनियम की शर्तें पूरी करनी होंगी।

उत्त प्रदेश सरकार ने 2,000 हेक्टेयर कुकराइल रिज़र्व वन के भीतर नाइट सफारी और जू पार्क परियोजना को देश‑पहला, विश्व‑स्तर का उद्यम बताया। इस कदम को लेकर पर्यावरणविद् और कुछ नागरिक याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय में चुनौती दी, यह तर्क देते हुए कि यह एक वाणिज्यिक पर्यटन है जो संरक्षित वन के मूल उद्देश्य को खतरे में डालता है।

कानूनी पृष्ठभूमि

फरवरी 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, किसी भी नाइट सफारी या जू स्थापित करने के लिए न्यायालय की पूर्व अनुमति अनिवार्य हो गई थी। इस संदर्भ में, तीन‑जजों की बेंच, जिसका प्रमुख मुख्य न्यायाधीश सूर्यkant थे, ने राज्य सरकार की आवेदन पर विचार किया। कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय, सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी और सेंट्रल एंपावरड कमेटी (CEC) की मंजूरियों को मान्य किया, साथ ही यह भी कहा कि राज्य को “100 %” शर्तों का पालन करना होगा।

पर्यावरणीय आश्वासन और निगरानी

क्लियर किया गया कि परियोजना के 71 % क्षेत्र में हरित आवरण रहेगा, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। कोर्ट ने CEC को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से साइट का निरीक्षण करें और किसी भी उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करें। साथ ही, तीन महीने बाद की स्थिति‑रिपोर्ट की मांग की गई, जिससे सतत पर्यावरणीय निगरानी सुनिश्चित हो सके।

जु‑पार्क का पुनर्स्थापन

पुराने नाबाब वाजिद अली शाह जू‑पार्क (पूर्व लखनऊ जू) को भी इस परियोजना के तहत 850 एकड़ के भीतर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि मौजूदा जू‑पार्क शहरी भीड़‑भाड़ और हाईवे के निकट होने के कारण वन्यजीवों के लिए उपयुक्त नहीं रहा। कोर्ट ने इस बिंदु को स्वीकार किया, यह देखते हुए कि सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी ने विस्तार तथा आधुनिकीकरण की अनुमति दी थी।

भविष्य की संभावनाएँ

यह निर्णय विकास और संरक्षण के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करता है। यदि सतत निगरानी और स्थानीय पर्यावरणीय पहलें सफल रहती हैं, तो कुकराइल नाइट सफारी एक मॉडल बन सकता है, जो पर्यटन राजस्व को बढ़ाते हुए वन्यजीव संरक्षण को भी सुदृढ़ करे। लेकिन किसी भी लापरवाही से वन्यजीवों की आवाज़ दब सकती है, जिससे भविष्य में समान प्रोजेक्ट्स के लिए कड़ी प्रतिरोधी आवाज़ उठ सकती है।