भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार के कुकरेल रिज़र्व वन में नाइट सफारी एवं ज़ू पार्क परियोजना को स्वीकृति दी। कोर्ट ने सभी नियामक निकायों की शर्तों का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया और किसी भी उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का इशारा किया।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने कुकरेल रिज़र्व में नाइट सफारी को अनुमोदित किया
- परियोजना को CEC, CZA और MoEFCC की शर्तों का पालन करना अनिवार्य है
- जुड़ाव के बाद वन्यजीव पर्यटन में नई दिशा मिलने की उम्मीद
नई दिल्ली – 15 जुलाई 2026 को, एकत्रित तीन-न्यायाधीशीय पैनल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत नाइट सफारी एवं ज़ू पार्क योजना को मंजूरी दी। इस निर्णय में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि केंद्रीय ज़ू अथॉरिटी (CZA) और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने पहले ही इस परियोजना को स्वीकृति दे दी थी, और अब सुप्रीम कोर्ट की भूमिका केवल नियामक शर्तों की पुष्टि करना थी।
पृष्ठभूमि और नियामक प्रक्रिया
कुकरेल रिज़र्व, जो लखनऊ के पास स्थित एक संवैधानिक वन है, पहले से ही विभिन्न वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों में शामिल रहा है। 2024 में राज्य सरकार ने इस क्षेत्र में एक “नाइट सफारी” स्थापित करने की योजना पेश की, जिसका उद्देश्य रात के समय वन्यजीवों को देखना और पर्यटन आय बढ़ाना था। इस प्रस्ताव को CEA, CZA और पर्यावरण एवं वन विभाग (MoEFCC) द्वारा विस्तृत मूल्यांकन के बाद स्वीकृति मिली, परन्तु अंतिम अनुमोदन के लिए सुप्रीम कोर्ट को याचिका दायर की गई।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुनवाई के दौरान, प्रतिवादियों ने कहा कि एक आरक्षित वन को पर्यटन के लिए उपयोग करना पर्यावरणीय जोखिम पैदा कर सकता है। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “ज़ू अब पुरानी चीज़ हैं; हमें पूरे देश को स्थिर नहीं रख पाना चाहिए।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सभी नियामक शर्तें पूरी की जाती हैं तो परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है, और किसी भी उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
परियोजना के संभावित प्रभाव
नाइट सफारी को भारत में पहली बार लागू किया जा रहा है, जिससे लखनऊ के निकटस्थ क्षेत्रों में पर्यटन प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय रोजगार सृजन में भी सहायक होगी, बशर्ते पर्यावरणीय मॉनिटरिंग सख़्त रहे। CEC को नियमित निरीक्षण करने और शर्तों के पालन की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजने का आदेश भी दिया गया है।
भविष्य की राह
अब उत्तर प्रदेश सरकार को शर्तों के अनुसार कार्य करना होगा – जिसमें रात के समय पार्क के प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण, और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल शामिल हैं। यदि सफल रहा, तो यह मॉडल अन्य राज्यों में समान परियोजनाओं के लिए एक मानक बन सकता है, जिससे भारत में वन्यजीव पर्यटन का नया युग आरंभ हो सकता है।