चेन्नई के 50 सरकारी विद्यालयों में आयोजित 14‑दिन का स्वच्छता पखवाड़ा समाप्त हुआ, जिसमें 10,000 से अधिक छात्रों ने सफाई, पढ़ाई और पर्यावरण जागरूकता के विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इस पहल का उद्देश्य सह-पाठ्यक्रम शिक्षा को सुदृढ़ करना और युवा वर्ग में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी उत्पन्न करना है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 10,000 से अधिक छात्र स्वच्छता पखवाड़ा में भाग लिया
  • 50 सरकारी स्कूलों में 14‑दिन की व्यापक अभियान
  • छात्रों को स्वच्छता, पढ़ाई और पर्यावरणीय जिम्मेदारी में सक्रिय बनाया गया

चेन्नई में आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा, जो The Hindu In School और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के संयुक्त प्रयास से चलाया गया, ने शहर के 50 सरकारी स्कूलों में दो हफ़्ते तक चलने वाले कार्यक्रम को एक भव्य समापन समारोह के साथ समाप्त किया। इस समारोह का आयोजन एशोक नगर के सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल में किया गया, जहाँ 10,000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया।

पृष्ठभूमि और उद्देश्य

स्वच्छता पखवाड़ा का मूल उद्देश्य स्कूल‑आधारित सह‑पाठ्यक्रम गतिविधियों के माध्यम से छात्रों में स्वच्छता, पढ़ाई और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देना है। यह अभियान 2023 में भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन की दिशा में एक स्थानीय स्तर की पहल के रूप में शुरू हुआ, लेकिन इस बार इसे शैक्षिक संस्थानों और निजी ऊर्जा निगम के सहयोग से विस्तारित किया गया।

मुख्य गतिविधियाँ और प्रतियोगिताएँ

अभियान के दौरान निबंध लेखन, चित्र प्रतियोगिता, प्रश्न‑उत्तर सत्र और पुस्तकालय भ्रमण जैसी कई शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। CEO कबीर ने छात्रों को पुस्तकालयों का प्रयोग करने, लेखन कौशल विकसित करने और स्वयं को एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में स्थापित करने के महत्व पर ज़ोर दिया। BPCL के प्रतिनिधि अजीथ ने छात्रों को स्वच्छता के दूत बनना सिखाते हुए विश्व के सबसे स्वच्छ देश और भारत के सबसे स्वच्छ शहर की पहचान करने को कहा।

शिक्षकों और प्रशासन की भूमिका

एशोक नगर के सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल की प्रिंसिपल वसुकी ने व्यक्तिगत स्वच्छता, अनुशासन और कचरा पृथक्करण के महत्व को दोहराते हुए जल और बिजली की बचत की भी सलाह दी। इस प्रकार, स्कूल प्रबंधन ने छात्रों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ-साथ सामाजिक अनुशासन भी सिखाया।

भविष्य की दिशा

स्वच्छता पखवाड़ा का सफल समापन यह संकेत देता है कि शैक्षिक संस्थानों में पर्यावरणीय शिक्षा को मुख्यधारा में लाना संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की पहल को नियमित रूप से चलाया जाए तो शहर की कुल स्वच्छता स्तर में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है, साथ ही छात्रों में जीवन भर के लिए जागरूकता का बीज बोया जा सकता है।