UPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए GS पेपर 2 के महत्वपूर्ण प्रश्न। इसमें आसियान (ASEAN) की केंद्रीयता और वैश्विक समुद्री मार्गों की संवेदनशीलता पर गहन विश्लेषण दिया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' में आसियान (ASEAN) की केंद्रीय भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- अमेरिका-ईरान तनाव वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
- भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखते हुए आसियान के साथ संबंधों को मजबूत करना होगा।
- कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स जैसे कि भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग क्षेत्रीय विकास की कुंजी हैं।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की आगामी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2026 की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए GS पेपर 2 के अंतर्गत अत्यंत महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न जारी किए गए हैं। इस सप्ताह के अभ्यास सत्र में मुख्य रूप से भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) और बदलती वैश्विक भू-राजनीति के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की संवेदनशीलता पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
आसियान (ASEAN) की केंद्रीयता और भारत की रणनीति
भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी', जिसे 2014 में 'लुक ईस्ट पॉलिसी' के उन्नत संस्करण के रूप में पेश किया गया था, अब आर्थिक एकीकरण से आगे बढ़कर रक्षा, समुद्री सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक फैल चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आसियान की केंद्रीयता (ASEAN Centrality) एक मुक्त, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए आधारशिला है। भारत के लिए आसियान केवल एक आर्थिक भागीदार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक स्तंभ है जो क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को संतुलित करने में मदद करता है।
वैश्विक समुद्री मार्ग और भू-राजनीतिक तनाव
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर के समुद्री व्यापार मार्गों की नाजुकता को उजागर कर दिया है। भारत के लिए, जो ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्गों पर अत्यधिक निर्भर है, इस प्रकार के संघर्षों के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। भू-राजनीतिक संघर्ष न केवल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बाधित करते हैं, बल्कि भारत के रणनीतिक और राजनयिक हितों को भी प्रभावित करते हैं।
भविष्य की राह: रणनीतिक स्वायत्तता का संतुलन
भारत को एक ओर आसियान के साथ अपने संबंधों को गहरा करना है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को सुरक्षित रखना है। इसके लिए भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान मल्टी-मोडल प्रोजेक्ट जैसे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा करना अनिवार्य है। साथ ही, इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) के माध्यम से समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना भारत की प्राथमिकता होनी चाहिए।