संसदीय स्वास्थ्य समिति ने NEET-UG परीक्षा के आयोजन और NTA की विफलता की समीक्षा की है। समिति ने सुधारों के लिए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और संस्थागत ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • संसदीय स्वास्थ्य समिति ने NEET-UG परीक्षा के आयोजन और NTA की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की।
  • समिति ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को सुधारों पर एक विस्तृत लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
  • बैठक में 'वन नेशन - वन एंट्रेंस टेस्ट' और AI-आधारित परीक्षण प्रणालियों पर भी चर्चा की गई।
  • NEET विवाद की जांच अब तक तीन अलग-अलग संसदीय समितियों के दायरे में आ चुकी है।

नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, संसदीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET-UG परीक्षा के विवादित आयोजन की समीक्षा की। समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली इस समिति ने NTA के अधिकारियों और विभिन्न विषय विशेषज्ञों को तलब किया ताकि परीक्षा प्रणाली में आई खामियों का विश्लेषण किया जा सके।

NTA सुधार और संस्थागत ढांचे पर दबाव

समिति ने न केवल परीक्षा के संचालन पर सवाल उठाए, बल्कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आने वाले नियामक संस्थानों के संगठनात्मक ढांचे और उनकी कार्यात्मक दक्षता पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों ने NMC अधिनियम, 2019 के तहत आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर चिंता व्यक्त की। इस दौरान, 'वन नेशन - वन एंट्रेंस टेस्ट' की अवधारणा और SmartInsta Test-AI (SITAI) जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन भी दिया गया, जिसका उद्देश्य भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना है।

स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और व्यापक जांच

NEET विवाद के अलावा, समिति ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सामर्थ्य और पहुंच पर भी विचार-विमर्श किया। इसमें राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के सचिव और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया जैसे उच्च अधिकारियों ने गवाही दी। गौरतलब है कि NEET पेपर लीक मामले की जांच अब तक तीन अलग-अलग संसदीय समितियों द्वारा की जा चुकी है, जो इस मुद्दे की गंभीरता और सरकार पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है।

भविष्य की राह और सख्त निर्देश

पूर्व में हुई चर्चाओं में शिक्षा मंत्रालय और NTA के शीर्ष अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया गया था। समिति ने अब संबंधित अधिकारियों को एक विस्तृत लिखित रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। यह कदम न केवल NTA की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए आवश्यक है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है कि भविष्य में चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं की पवित्रता से कोई समझौता न हो।