दिल्ली विश्वविद्यालय के 'साइंस ऑफ हैप्पीनेस' कोर्स में दो वर्षों में 2,000 से अधिक छात्रों ने दाखिला लिया है। यह पाठ्यक्रम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खुशहाली और भावनात्मक लचीलेपन को समझने पर केंद्रित है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 'साइंस ऑफ हैप्पीनेस' कोर्स में अब तक 2,000 से अधिक छात्र शामिल हो चुके हैं।
- यह पाठ्यक्रम 17 कॉलेजों और मनोविज्ञान विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है।
- इसका उद्देश्य छात्रों में भावनात्मक लचीलापन, आत्म-जागरूकता और सकारात्मक संबंधों का विकास करना है।
- रिक्ही फाउंडेशन के साथ साझेदारी के माध्यम से इस पहल को मजबूती मिली है।
देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने शिक्षा के पारंपरिक ढांचे को तोड़ते हुए छात्रों के मानसिक और भावनात्मक कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक अनूठी पहल की है। विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किया गया 'साइंस ऑफ हैप्पीनेस' (Science of Happiness) नामक एक सेमेस्टर का 'वैल्यू-ऐडेड' कोर्स छात्रों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो रहा है। पिछले दो वर्षों में, इस पाठ्यक्रम में 2,000 से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया है, जो आधुनिक शिक्षा प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है।
पाठ्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
इस पाठ्यक्रम की शुरुआत मार्च 2024 में रिक्ही फाउंडेशन फॉर हैप्पीनेस के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के बाद हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप रिक्ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर द साइंस ऑफ हैप्पीनेस की स्थापना हुई। यह कोर्स केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खुशी के पीछे के विज्ञान को समझने और उसे अपने जीवन में लागू करने में मदद करता है।
पाठ्यक्रम के प्रमुख उद्देश्यों में छात्रों को उनकी ताकत और जीवन के उद्देश्य को खोजने में मदद करना, जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए लचीलापन (Resilience) विकसित करना और दूसरों के प्रति सहानुभूति पैदा करना शामिल है। विश्वविद्यालय का मानना है कि खुशी केवल एक भावना नहीं है, बल्कि यह नवाचार, सामुदायिक विकास और सामाजिक जुड़ाव का एक प्रमुख चालक है।
प्रमुख संस्थानों में विस्तार
वर्तमान में, यह कोर्स मिरांडा हाउस, लेडी श्री राम कॉलेज (LSR), हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, और श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) जैसे देश के शीर्ष कॉलेजों सहित कुल 17 कॉलेजों और विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा पेश किया जा रहा है। कुलपति योगेश सिंह की अध्यक्षता में हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस कार्यक्रम की सफलता पर चर्चा की गई, जहाँ विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्यों ने छात्रों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखे।
भविष्य की संभावनाएं
दिल्ली विश्वविद्यालय अब इस पाठ्यक्रम को स्नातकोत्तर (Postgraduate) छात्रों के लिए एक कौशल-आधारित पेपर के रूप में पेश करने पर विचार कर रहा है। जैसे-जैसे शैक्षणिक जगत में मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) का महत्व बढ़ रहा है, DU की यह पहल अन्य विश्वविद्यालयों के लिए एक मॉडल बन सकती है।