असम के गोलपारा जिले में आयोजित प्रेरणादायक शिविरों ने उन बच्चों में नई उम्मीद जगाई है जो आर्थिक तंगी के कारण स्कूल छोड़ चुके थे। ये बच्चे अब शिक्षक, विधायक और उद्यमी बनकर समाज में बदलाव लाना चाहते हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- असम के गोलपारा जिले में 'सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस एंड लाइवलीहुड' (CML) द्वारा 10 दिवसीय प्रेरणादायक शिविर आयोजित किए गए।
- स्कूल छोड़ चुके 45 बच्चों ने शिक्षक, विधायक और उद्यमी बनने की इच्छा व्यक्त की।
- शिक्षा मंत्री रनोज पेगु के अनुसार, असम में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 17.5% है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
- इन शिविरों का उद्देश्य बच्चों को औपचारिक शिक्षा की ओर वापस लाना और उन्हें आवश्यक शिक्षण सामग्री प्रदान करना है।
असम के दक्षिण-पश्चिमी गोलपारा जिले में एक प्रेरक बदलाव देखने को मिला है। जिन बच्चों को गरीबी, बाल श्रम और मौसमी प्रवास के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी, वे अब बड़े सपने देख रहे हैं। हाल ही में आयोजित तीन 10-दिवसीय प्रेरणादायक शिविरों में भाग लेने वाले 45 बच्चों ने यह साबित कर दिया है कि यदि अवसर मिले, तो अभावों में पल रहे बच्चे भी समाज की दिशा बदल सकते हैं।
सपनों की उड़ान: विधायक से उद्यमी तक
इन शिविरों की सबसे खास बात बच्चों की महत्वाकांक्षाएं थीं। जहां कुछ बच्चे डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहते हैं, वहीं कुछ का लक्ष्य विधायक (MLA) बनना है। दिलचस्प बात यह है कि वे सत्ता या विलासिता के लिए नहीं, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधि की शक्ति का उपयोग अपने आसपास के लोगों के जीवन को सुधारने के लिए करना चाहते हैं। अन्य बच्चे शिक्षक बनकर उन लोगों को शिक्षित करना चाहते हैं जो शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते, और कुछ उद्यमी बनकर रोजगार पैदा करना चाहते हैं ताकि कोई भी भूखा न सोए।
चुनौतियां और जमीनी हकीकत
12 वर्षीय निशांत राभा की कहानी इन बच्चों के संघर्ष का प्रतीक है। निशांत के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और माता लंबे समय से बीमार हैं। आर्थिक मदद के लिए निशांत को स्कूल छोड़ने के साथ-साथ काम भी करना पड़ा। असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगु ने हाल ही में स्वीकार किया कि हालांकि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर में सुधार हुआ है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर यह अभी भी 17.5% है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।
सामुदायिक प्रयास और भविष्य की राह
टाटा ट्रस्ट्स की पहल 'सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस एंड लाइवलीहुड' (CML) ने इन बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए डोर-टू-डोर सर्वे किया। शिविरों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास जगाया गया। अब इन बच्चों को स्कूल वापस भेजने के लिए 'मेनस्ट्रीमिंग किट' (स्कूल बैग, नोटबुक, स्टेशनरी आदि) प्रदान की जाएगी। यह पहल न केवल शिक्षा की कमी को पूरा करने का प्रयास है, बल्कि समाज के सबसे वंचित वर्ग को सशक्त बनाने की एक बड़ी मुहिम है।