सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को डिजिटल मूल्यांकन (OSM) प्रणाली में उत्पन्न irregularities को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी देने को कहा। एक‑सदस्यीय आयोग की नियुक्ति के साथ छात्रों की शिकायतों का त्वरित समाधान मांगा गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को OSM प्रणाली में सुधार के लिए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
- एक‑सदस्यीय आयोग, स रूधा चौहान, मुद्दे की जाँच और सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करेगा।
- केन्द्र ने पहले ही CBSE के अध्यक्ष और सचिव को हटाकर प्रणाली की खरीद प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है।
नई दिल्ली: 16 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) को डिजिटल मूल्यांकन (ऑन‑स्क्रीन मार्किंग, OSM) प्रणाली में देखी गई गड़बड़ियों को रोकने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया। यह आदेश तब आया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि इस विषय पर एक‑सदस्यीय आयोग की स्थापना की गई है।
पृष्ठभूमि और समस्या का विस्तार
OSM प्रणाली को 2023‑24 शैक्षणिक सत्र में बड़े पैमाने पर लागू करने का लक्ष्य था, जिससे छात्रों के उत्तरपत्रों की तेज़ और पारदर्शी जाँच संभव हो सके। हालांकि, कई राज्यों में स्कैनिंग त्रुटियों, पोर्टल गड़बड़ियों और अनियमितता की शिकायतें आईं। क्लास X के छात्रों के उत्तरपत्रों को पहली बार स्कैन करने पर कुछ पृष्ठों का स्कैन न होना, पढ़ने में कठिनाइयाँ और कुछ उत्तरों की जाँच न होना प्रमुख समस्याएँ बताई गईं। इन समस्याओं ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच व्यापक असंतोष उत्पन्न किया।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
मुख्य न्यायाधीश सुय्यर कांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी मोहन ने इस मुद्दे को “अतिरिक्त तात्कालिकता” के रूप में वर्गीकृत किया और छात्रों की निराशा को “युवा बच्चों को हुई पीड़ा” के रूप में उजागर किया। उन्होंने कहा, “CBSE को मूल्यांकन की योजना बनाने का अधिकार है, परन्तु इसके कार्यान्वयन में तकनीकी खामियों को शीघ्रता से सुलझाना अनिवार्य है।”
केन्द्र की कार्रवाई और आयोग की भूमिका
जून 2, 2026 को केन्द्रीय सरकार ने CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ते को तत्काल प्रभाव से हटाया और OSM प्रणाली की खरीद प्रक्रिया की जाँच का आदेश दिया। इसके बाद, सॉलिसिटर जनरल ने स रूधा चौहान नाम की एक‑सदस्यीय आयोग की नियुक्ति की सूचना दी, जो इन तकनीकी गड़बड़ियों की जाँच कर व्यापक सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि आयोग के निष्कर्ष और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने में बड़ी प्रगति हो सकती है। यह न केवल परीक्षा प्रक्रिया को तेज़ करेगा, बल्कि भविष्य में ऑनलाइन शिक्षा के विस्तार के लिए एक मॉडल भी स्थापित कर सकता है। हालांकि, निरंतर निगरानी और तकनीकी अद्यतन आवश्यक रहेगा, ताकि फिर से ऐसी ही गड़बड़ियों से बचा जा सके।