CBI ने दिल्ली के अदालत को बताया कि लातूर के कोच शिवराज मोतेगांवकर के फ़ोन से मिले 136 प्रश्नों में से 111 प्रश्न राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के मूल प्रश्न सेट से मेल खाते हैं। यह लीकेज 23 अप्रैल 2026 को हुआ था, जिससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 111 प्रश्न NTA मास्टर सेट से मेल खाते हैं
  • लीक 23 अप्रैल 2026 को हुआ
  • CBI ने अब तक 13 गिरफ्तारियां की हैं

नई दिल्ली – केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली के एक अदालत में बताया कि लातूर के लोकप्रिय रेनुकी केमिस्ट्री क्लासेज के संस्थापक एवं यूट्यूब चैनल Motegaonkar Sir’s RCC के मालिक शिवराज मोतेगांवकर के मोबाइल फ़ोन से बरामद 136 हाथ‑लेखित रासायनिक प्रश्नों में से 111 प्रश्न राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा तैयार किए गए मूल प्रश्न सेट से सटीक मेल खाते हैं।

केस की पृष्ठभूमि

NEET‑UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई, लेकिन परीक्षा के दो हफ्ते पहले ही प्रश्नों का लीक होना एक बड़ा धक्का था। CBI की रिपोर्ट के अनुसार, प्रश्न 23 अप्रैल को लातूर के सिद्धिविनायक अस्पताल के परिसर में, जहाँ शहर के बाल रोग विशेषज्ञ मनोज शिरुरे चलाते हैं, से प्राप्त हुए। इस लीक में शामिल एक अन्य आरोपी पी.वी. कुलकर्णी, जो NTA के पैनल सदस्य और अनुवादक थे, पर भी संदेह लगाया गया।

लीक की विधि और बिक्री

जांच के दौरान पता चला कि प्रश्नों को टेलीग्राम के माध्यम से 10 लाख रुपये में बेचा गया। साथ ही, एक “गेस पेपर” 150 पृष्ठों का, जिसमें 410 प्रश्न थे, कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से कुछ हफ़्ते पहले ही वितरित किया गया। इस गेस पेपर में से लगभग 120 प्रश्न ने वास्तविक NEET‑UG 2026 के रसायन विज्ञान पेपर में प्रकट हुए।

पुलिस कार्रवाई और प्रभाव

अब तक इस केस में दिल्ली, जयपुर, गुड़गांव, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यनगर के कई शिक्षक और छात्र सहित 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस लीक के कारण 3 मई को परीक्षा देने वाले 22.7 लाख अभ्यर्थियों में से बड़ी संख्या ने परीक्षा के परिणामों पर भरोसा खो दिया। NTA ने 12 मई को परीक्षा को रद्द कर दिया, जिससे छात्रों की पढ़ाई और तैयारी में अनिश्चितता बढ़ी।

भविष्य की दिशा

CBI ने कहा कि इस तरह की गंभीर लीक रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के प्रश्नों का डिजिटल एन्क्रिप्शन, कड़े निगरानी और संभावित अंदरूनी स्रोतों की पहचान के लिए अधिक सख्त जांच प्रक्रिया लागू की जानी चाहिए।