सेकंडराबाद स्थित भारतीय रेलवे सिग्नलिंग संस्थान IRISET ने सेंट पीटर्स इंजीनियरिंग कॉलेज और केजी रेड्डी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करके ‘कवच’ पर आधारित B.Tech कार्यक्रम शुरू किया। यह कोर्स छात्रों को उन्नत रेलवे सुरक्षा तकनीक में प्रवीण बनाकर रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- IRISET ने दो प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ ‘कवच’ पर B.Tech कोर्स शुरू किया।
- कोर्स का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक रेलवे सिग्नलिंग और ATP तकनीक में विशेषज्ञ बनाना है।
- यह पहल रेलवे सुरक्षा और क्षमता निर्माण के राष्ट्रीय मिशन के साथ संरेखित है।
IRISET (इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्यूनिकेशन्स), सेकंडराबाद, ने सेंट पीटर्स इंजीनियरिंग कॉलेज और केजी रेड्डी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के साथ दो समझौते (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों के तहत ‘कवच’—एक स्वदेशी विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली—पर केंद्रित B.Tech पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।
‘कवच’ प्रणाली का महत्व
‘कवच’ भारत में विकसित पहला ATP सिस्टम है, जो ट्रेनों के बीच टक्कर को रोकने, गति नियंत्रण और संकेतों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है। इस प्रणाली ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे की सुरक्षा मानकों को ऊँचा किया है, जिससे दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने के साथ, कुशल इंजीनियरों की मांग भी तीव्र हो गई है।
शिक्षा और उद्योग का संगम
कोर्स का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान करना है। IRISET के अतिरिक्त निदेशक जनरल लोकेश विष्णोई और वरिष्ठ प्रोफेसर टी. रमेश बाबू ने सेंट पीटर्स के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग के प्रमुख के. प्रसन्न कुमार तथा केजी रेड्डी के प्रिंसिपल एस. साई सत्यनारायण रेड्डी के साथ व्यक्तिगत MoUs पर हस्ताक्षर किए। यह सहयोग छात्रों को रेल परिवहन और बुनियादी ढाँचा क्षेत्रों में उच्च रोजगार संभावनाएँ प्रदान करेगा।
राष्ट्रीय मिशन के साथ संरेखण
यह कदम रेलवे मंत्रालय के व्यापक मिशन का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य सिग्नलिंग और सुरक्षा प्रणालियों में क्षमता एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। उद्योग‑अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करके, भारत तेज़, सुरक्षित और टिकाऊ रेल नेटवर्क की दिशा में अग्रसर हो रहा है।
भविष्य की संभावनाएँ
‘कवच’ कोर्स न केवल भारत के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संभावित निर्यात के अवसर खोल सकता है। जैसे-जैसे अन्य देशों में भी इस प्रकार की ATP तकनीक की माँग बढ़ेगी, प्रशिक्षित स्नातकों को वैश्विक रोजगार बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।